हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
30 फीट ऊंची लपटों से सुरक्षित निकले संजू पंडा
मथुरा के फालैन गांव में होलिका दहन के दौरान आस्था का अनोखा दृश्य देखने को मिला। मंगलवार रात जब होली की अग्नि अपने चरम पर थी, तब संजू पंडा धधकती हुई करीब 30 फीट ऊंची लपटों के बीच से सुरक्षित बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगभग 20 फीट लंबी और 30 फीट चौड़ी थी। जैसे ही वह अग्नि से बाहर आए, हजारों श्रद्धालुओं ने “जय श्री कृष्ण” के जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजा दिया।
प्रह्लाद परंपरा से जुड़ी आस्था
मान्यता है कि फालैन वही स्थान है जहां भक्त प्रह्लाद को जलाने के लिए होलिका उन्हें गोद में लेकर अग्नि में बैठी थी। इसी 5200 साल पुरानी परंपरा को निभाते हुए पंडा परिवार का एक सदस्य हर वर्ष जलती होली की अग्नि को पार करता है। इस बार यह जिम्मेदारी संजू पंडा ने निभाई। उनसे पहले उनके पिता और भाई भी कई बार इस परंपरा का निर्वहन कर चुके हैं।
45 दिनों की कठोर तपस्या
संजू पंडा ने बताया कि यह केवल साहस का कार्य नहीं, बल्कि 45 दिनों की कठिन साधना का परिणाम है। वसंत पंचमी से व्रत की शुरुआत होती है। इस दौरान अन्न का त्याग कर केवल फलाहार लिया जाता है और ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता है। होलिका दहन से पहले उन्होंने प्रह्लाद कुंड में स्नान कर भगवान का आशीर्वाद लिया।
आस्था बनाम विज्ञान
जब संजू पंडा अग्नि से सकुशल बाहर आए तो लोगों ने इसे ईश्वरीय कृपा बताया। स्वयं संजू पंडा का कहना है कि अग्नि के बीच उन्हें दिव्य मार्गदर्शन का अनुभव हुआ। यह घटना एक बार फिर ब्रज की अनूठी होली और सनातन आस्था की गहराई को दर्शाती है।
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