हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
एएमयू छात्रों के लिए ‘प्रोफेसर सुहैल साबिर लाइफटाइम छात्रवृत्ति’ की स्थापना
अलीगढ़, 27 सितम्बरः अपने शिक्षण संस्थान के प्रति प्रतिबद्धता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के 1988 बैच के छात्र, अमेरिका और कनाडा से जुड़े सेवानिवृत्त रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर सुहैल साबिर ने अपने पुत्र-पुत्रियों के साथ मिलकर एएमयू छात्रों के लिए एक स्थायी छात्रवृत्ति प्रदान किये जाने की घोषणा की है। यह पहल अलीगढ़ एलुमनाई एसोसिएशन, वॉशिंगटन डीसी के सहयोग से शुरू की गई है, जो पूर्व छात्रों की निष्ठा और परोपकारिता का उज्ज्वल उदाहरण है।
यह छात्रवृत्ति प्रो. सुहैल साबिर के एक शिक्षक, शोधकर्ता और मार्गदर्शक के रूप में विशिष्ट योगदान को सम्मानित करने के लिए स्थापित की गई है, ताकि योग्य छात्रों की शैक्षणिक यात्रा आर्थिक कठिनाइयों से प्रभावित न हो। सतत वित्तीय सहयोग के माध्यम से यह पहल उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता और समावेशिता को बढ़ावा देने के विश्वविद्यालय के मिशन को सुदृढ़ करती है।
प्रो. साबिर का एएमयू से जुड़ाव हमेशा शैक्षणिक गतिविधियों और संस्थागत सेवाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से परिभाषित रहा है। मार्गदर्शक और विद्वान की भूमिका के साथ-साथ उन्होंने प्रोवोस्ट और एएमयू एलुमनाई अफेयर्स कमेटी के चेयरमैन के रूप में 2018 तक सेवा दी। 2024 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने छात्र कल्याण और शिक्षा के प्रति अपनी आजीवन निष्ठा को और प्रबल किया तथा एएमयू में आर्थिक रूप् से पिछड़े छात्रों के लिए छात्रवृत्ति स्थापित करने हेतु 50 लाख रुपये का दान दिया।
एएएडीसी की ओर से आभार व्यक्त करते हुए छात्रवृत्ति समिति के चेयरमैन अफजल उस्मानी ने कहा कि यह गर्व की बात है कि प्रो. साबिर के छात्र और परिजन इस महान कार्य के लिए एएएडीसी को भागीदार बना रहे हैं। उनकी उदारता एएमयू से पूर्व छात्रों के गहरे रिश्ते को दर्शाती है और यह पहल अन्य कई लोगों को उज्ज्वल भविष्य गढ़ने में योगदान करने के लिए प्रेरित करेगी।
एएमयू एलुमनाई अफेयर्स कमेटी के चैयरमैन प्रो. सरताज तबस्सुम ने कहा कि यह महान पहल सर सैयद के दृष्टिकोण की भावना का प्रमाण है। इस स्थायी छात्रवृत्ति की स्थापना करके हमारे पूर्व छात्रों ने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो अन्य लोगों को भी एएमयू छात्रों के समर्थन के लिए प्रेरित करेगा।
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एएमयू के जेएन मेडीकल कालिज में एंटीमाइक्रोबियल स्टेवार्डशिप को सशक्त बनाने हेतु ओपीएटी कार्यशाला आयोजित
अलीगढ़, 27 सितम्बरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएनएमसीएच) के मेडिसिन विभाग और हॉस्पिटल इन्फेक्शन कंट्रोल सोसाइटी ने शिक्षकों, रेजिडेंट्स और नर्सिंग स्टाफ के लिए “ओपीएटी (आउट पेशेंट एंटीमाइक्रोबियल थैरेपी) के कार्यान्वयन” पर एक कार्यशाला का आयोजन किया।
ओपीएटी, एंटीमाइक्रोबियल स्टेवार्डशिप का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि को कम करना, स्वास्थ्यसेवा-संबंधी संक्रमणों के जोखिम को न्यूनतम करना, अस्पताल स्टाफ पर बोझ घटाना और साथ ही मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीन, प्रिंसिपल एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर मोहम्मद हबीब रजा ने इस संयुक्त पहल की सराहना की और कहा कि स्वास्थ्यसेवा-संबंधी संक्रमणों को रोकना और एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के तार्किक उपयोग को बढ़ावा देना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने के लिए इस प्रकार की और व्यावहारिक कार्यशालाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।
मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. ख्वाजा सैफुल्लाह जफर ने रेजिडेंट्स चिकित्सकों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया और युवा शिक्षकों की एक टीम गठित करने की घोषणा की, जो एचआईसीसी के साथ मिलकर ओपीएटी कार्यान्वयन पर कार्य करेगी।
एचआईसीसी की सचिव और माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रो. फातिमा खान ने इस पहल की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कार्यशाला एआईआईएमएस, मंगलगिरि द्वारा तैयार किए गए एंटीमाइक्रोबियल स्टेवार्डशिप पर आधारित 42 प्रैक्टिस स्टेटमेंट्स के अनुरूप परिकल्पित की गई है। उन्होंने ओपीएटी प्रोटोकॉल पर एक तकनीकी सत्र का संचालन भी किया।
कार्यक्रम में ओपीएटी के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर क्लिनिकल केस चर्चाएं शामिल रहीं, साथ ही माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. शारिक अहमद ने पूर्व और पश्च परीक्षण आयोजित किए।
कार्यक्रम का समापन मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सैयद हसन आमिर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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‘स्वच्छता ही सेवा 2025’ अभियान के तहत एएमयू विभागों ने दिखाई स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी की मिसाल
अलीगढ़, 27 सितम्बरः राष्ट्रव्यापी ‘स्वच्छता ही सेवा 2025’, सेवा पर्व और ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (वीबीवाईएलडी)’ के अंतर्गत अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों ने स्वच्छता, स्वास्थ्य और नागरिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की।
बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग (डीबीए) ने “श्रमदान-एक दिन, एक घंटा, एक साथ” शीर्षक के तहत परिसर में व्यापक स्वच्छता और स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाया। इस पहल में विभागीय भवन की सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता पर जागरूकता गतिविधियां शामिल रहीं। शिक्षकों और छात्रों को सुरक्षा सुनिश्चित करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए एप्रन, दस्ताने, मास्क और कैप वितरित किए गए।
यह अभियान विभागाध्यक्ष प्रो. सलमा अहमद के निर्देशन में आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस पहल का उद्देश्य भावी व्यवसायिक नेतृत्वकर्ताओं में पर्यावरणीय चेतना और नागरिक कर्तव्य की मजबूत भावना पैदा करना था, ताकि वे सामाजिक रूप से उत्तरदायी स्नातक बनकर उभरें। प्रो. अहमद ने स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के लिए सामूहिक प्रयासों के महत्व पर बल दिया। विभाग ने शैक्षणिक वर्ष के दौरान इसी प्रकार के जनजागरूकता और संपर्क कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।
इसके अलावा जे.एन. मेडिकल कॉलेज के फिजियोलोजी विभाग ने ‘स्वच्छता ही सेवा 2025’, सेवा पर्व और विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (वीबीवाईएलडी) के अंतर्गत जूनियर रेजिडेंट्स (जेआर) के लिए क्विज प्रतियोगिता आयोजित की।
शैक्षणिक गंभीरता और नागरिक विषयों को जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित इस क्विज में अनुप्रयुक्त शरीर क्रिया विज्ञान, स्वच्छता प्रथाओं और राष्ट्रनिर्माण के व्यापक आदर्शों पर प्रश्न पूछे गए। विभागाध्यक्ष प्रो. गुल आर नवी खान के अनुसार, जेआर-प्रथम और जेआर-द्वितीय दोनों श्रेणियों के स्नातकोत्तर छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
जेआर-प्रथम श्रेणी में डॉ. मोहम्मद आमिर और डॉ. मोहम्मद रजी विजेता रहे, जबकि जेआर-द्वितीय श्रेणी में डॉ. पेरुगु दामोदर कृष्णा चैतन्य ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। सभी विजेताओं को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और सार्वजनिक स्वास्थ्य विषयों में सहभागिता के सम्मान स्वरूप मेरिट प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
शिक्षकों और स्टाफ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम ने भावी चिकित्सा पेशेवरों में आलोचनात्मक सोच, सहयोग और नेतृत्व को प्रोत्साहित किया। इसने विभाग की चिकित्सा शिक्षा में सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता को समाहित करने की प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया।
एएमयू के विभिन्न विभागों की ये पहल विश्वविद्यालय की समग्र विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, जहां शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी और सक्रिय नागरिकता को भी समान महत्व दिया जाता है। ‘स्वच्छता ही सेवा 2025’ में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से एएमयू स्वच्छ, स्वस्थ और विकसित भारत के राष्ट्रीय अभियान को निरंतर समर्थन दे रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय डेंटल कॉन्फ्रेंस में एएमयू फैकल्टी ने शोध पत्र प्रस्तुत किया
अलीगढ़, 27 सितम्बरः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के डॉ. जेड.ए. डेंटल कॉलेज के प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग के शिक्षक डॉ. पंकज खराड़े ने नई दिल्ली में आयोजित इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर डेंटल, ओरल एंड क्रेनियोफेशियल रिसर्च एशिया पैसिफिक रीजनल एंड डब्लू डब्लू 9 कॉन्फ्रेंस में अपना शोध प्रस्तुत किया।
उनका शोधपत्र “हेड एंड नेक कैंसर रोगियों में स्पीच असेसमेंट पर मैक्सिलोफेशियल प्रोस्थेटिक रिहैबिलिटेशन का प्रभाव” विषय पर केंद्रित था कि किस प्रकार प्रोस्थेटिक पुनर्वास बोलने की क्षमता के मानकों में उल्लेखनीय सुधार करता है, निगलने की दक्षता को बढ़ाता है और चबाने की कार्यक्षमता को पुनः स्थापित करता है।
डॉ. खराड़े ने साक्ष्य-आधारित उपचार परिणामों और कैंसर रोगियों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने में नैदानिक अनुसंधान की अहम भूमिका पर बल दिया।
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राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर एएमयू के स्कूलों में जागरूकता व्याख्यान और शपथ ग्रहण कार्यक्रम
अलीगढ़, 27 सितम्बरः आगामी राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस (एनवीबीडीडी), जो हर वर्ष 1 अक्टूबर को मनाया जाता है, के उपलक्ष्य में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के स्कूलों में स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
एस.टी.एस. स्कूल, एएमयू में “गिव ब्लड, गिव होपः टुगेदर वी सेव लाइव्स” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया, जो एनवीबीडीडी 2025 की आधिकारिक थीम है। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों ने भाग लिया। व्याख्यान में नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान के जीवन रक्षक महत्व तथा दयालु एवं सामाजिक रूप से उत्तरदायी समाज के निर्माण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
स्कूल के प्रिंसिपल फैसल नफीस ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि रक्तदान केवल दया का कार्य नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी नैतिक और नागरिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान जीवनदान और आशा देने का कार्य है। हमें दूसरों के जीवन को बचाने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने छात्रों से इस दिशा में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
साथ ही, एएमयू के अहमदी स्कूल फॉर द विजुअली चैलेंज्ड में भी एनवीबीडीडी के महत्व को रेखांकित करने हेतु जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई, जिसे इरम फातिमा ने प्रस्तुत किया। उन्होंने इस वर्ष की थीम की प्रासंगिकता पर जोर दिया और 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलने वाले मेगा ब्लड डोनेशन ड्राइव का परिचय दिया। इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक दाताओं का पंजीकरण कराना और देशभर में सुरक्षित एवं निरंतर रक्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
दोनों स्कूलों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से नियमित रक्तदान करने, जागरूकता फैलाने और जरूरतमंदों की सहायता करने की शपथ ली, भले ही उनका धर्म, जाति या पृष्ठभूमि कुछ भी हो।
अहमदी स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. नायला राशिद ने भी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हर एक रक्तदान जीवन बचाने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने सभी को इस मानवीय कार्य में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया और बताया कि किसी भी प्रभावी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की रीढ़ स्वैच्छिक रक्तदाता होते हैं।
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राजा महेंद्र प्रताप सिंह ए.एम.यू. सिटी स्कूल में हिंदी सप्ताह के तहत हिंदी क्विज प्रतियोगिता का आयोजन
अलीगढ़, 27 सितम्बरः राजा महेंद्र प्रताप सिंह एएमयू. सिटी स्कूल में हिंदी सप्ताह के अवसर पर आयोजित हिंदी क्विज प्रतियोगिता का विश्वविद्यालय के सभी स्कूलों के मध्य शानदार मुकाबला हुआ। प्रतियोगिता में विभिन्न विद्यालयों की टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और हिंदी भाषा एवं साहित्य से जुड़े प्रश्नों का बेहतरीन उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर स्कूल के प्रधानाचार्य सैय्यद तनवीर नबी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की पहचान है। हिंदी हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है और हमारी संस्कृति व परंपरा को सहेजती है। छात्रों को चाहिए कि वे हिंदी भाषा का सम्मान करें और इसे अपनी अभिव्यक्ति का साधन बनाकर आगे बढ़ें।
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक तथा हिंदी विभाग के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. जुल्फिकार ने संचालन करते हुए छात्रों को संबोधन में कहा कि हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि यह भावनाओं को जोड़ने वाली डोर है। छात्र हिंदी में रुचि लेकर न केवल साहित्य और संस्कृति को समझ सकते हैं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसका लाभ उठा सकते हैं। आज वैश्विक स्तर पर हिंदी का महत्व बढ़ रहा है, ऐसे में युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे इसे सीखें और आगे बढ़ाएँ।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सैय्यदना ताहिर सैफुद्दीन स्कूल की टीम ने हासिल किया। द्वितीय स्थान राजा महेंद्र प्रताप सिंह ए.एम.यू. सिटी स्कूल की टीम को मिला, जबकि तृतीय स्थान ए.बी.के. गर्ल्स स्कूल की टीम के हिस्से में आया।
निर्णायक मंडल में मोहम्मद नईम और शीबा खान शामिल रहे, जिन्होंने निष्पक्षता और सूझ-बूझ के साथ परिणाम घोषित किया। प्रतियोगिता के अंत में प्रधानाचार्य सैय्यद तनवीर नबी और उप-प्रधानाचार्य डॉ. शाहिद जलील ने विजयी छात्रों को पुरस्कार वितरित किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
धन्यवाद ज्ञापन नाहीद अकबरी ने प्रस्तुत किया, वहीं स्कूल की कल्चरल कोऑर्डिनेटर शाजिया कमर ने पूरे आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। आई टी सेल के शिक्षकों ने भी कार्यक्रम को आकर्षित बनाने में अहम योगदान दिया।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जर्मन भाषा के 10 छात्रों ने डीएएडी आॅन एसईटी छात्रवृत्ति परीक्षा में किया शानदार प्रदर्शन
अलीगढ़, 27 सितंबरः अलिगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संकाय, विदेशी भाषाओं विभाग के बी.ए. जर्मन अध्ययन कार्यक्रम के दस स्नातक छात्रों ने डीएएडी आन सीईटी छात्रवृत्ति परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विभाग के नाम को गौरवान्वित किया है।
आनसेट एक मानकीकृत भाषा प्लेसमेंट टेस्ट है और यह जर्मनी में 2026 के डीएएडी-प्रायोजित विश्वविद्यालय ग्रीष्मकालीन पाठ्यक्रमों में आवेदन करने के लिए अनिवार्य है।
सफल छात्रों में मोहम्मद बिलाल, शाममा सैफ, हरीम बेग, सोनिया प्रजापति, इकरा नसीम, जोया संदली, सिब्ते मुस्तफा, मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आसिद रजा शामिल हैं। इसमें इकरा नसीम ने बी2 स्तर पर प्रवीणता हासिल कर विशिष्ट पहचान बनाई, जबकि अन्य छात्रों ने बी1 स्तर प्राप्त किया।
सफल छात्रों को बधाई देते हुए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संकाय के डीन और विदेशी भाषाओं विभाग के अध्यक्ष प्रो. आफताब आलम ने कहा कि ये परिणाम हमारे छात्रों की वैश्विक शैक्षणिक वातावरण में भाग लेने की बढ़ती क्षमता को दर्शाते हैं।
जर्मन के सहायक प्रोफेसर सैयद सलमान अब्बास ने छात्रों की निष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रवीणता परीक्षा में बी1 और बी2 स्तर प्राप्त करना स्नातक छात्रों के लिए सराहनीय उपलब्धि है। यह सफलता उनके परिश्रम और विभाग की गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
जर्मन के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुमन सिंह ने कहा कि हमारे छात्रों की दृढ़ता और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए डीएएडी और अन्य अंतरराष्ट्रीय अवसरों को हासिल करने के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश करता है।
जर्मन के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुबैर पी.एम. ने इस सफलता पर कहा कि ये परिणाम एएमयू की वैश्विक शैक्षणिक गतिशीलता को बढ़ावा देने में भूमिका को मजबूत करते हैं और आज के अंतरसंबंधित विश्व में अंतरसांस्कृतिक दक्षता के महत्व को उजागर करते हैं।
















