हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अलीगढ़: खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामलों को लेकर शासन ने बड़ी नीति बदलाव करते हुए नई गाइडलाइन जारी की है। अब खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग (FDA) मिलावट जैसे मामलों में सीधे FIR दर्ज नहीं करा सकेगा। इसके बजाय पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में परिवाद शिकायत दायर करनी होगी। अभियोजन निदेशालय के निर्देश के बाद यह व्यवस्था लागू की गई है।
31 गंभीर मामलों में लागू होगी नई व्यवस्था
नई गाइडलाइन के तहत सिर्फ मिलावट ही नहीं, बल्कि कुल 31 गंभीर मामलों में भी सीधे FIR दर्ज नहीं होगी। इनमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, चेक बाउंस, भ्रूण हत्या, पर्यावरण प्रदूषण, बाल श्रम, उपभोक्ता धोखाधड़ी, ट्रेडमार्क उल्लंघन, मानव अंग तस्करी और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न जैसे मामले शामिल हैं। इन सभी मामलों में पहले संबंधित कोर्ट में शिकायत दर्ज करनी होगी।
कारोबारियों को राहत, पुलिस प्रक्रिया में बदलाव
इस फैसले से व्यापारिक संगठनों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि वे लंबे समय से सीधे FIR दर्ज होने का विरोध कर रहे थे। पहले मिलावट के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत FIR दर्ज होती थी, लेकिन अब प्रक्रिया बदल दी गई है। इससे पुलिस पर भी सीधे मुकदमे दर्ज करने का दबाव कम होगा।
झूठे मामलों पर लगेगी रोक
पूर्व डीएसपी एससी वार्ष्णेय के अनुसार, इस नई व्यवस्था से झूठी और बेबुनियाद शिकायतों पर अंकुश लगेगा। इससे न्यायिक प्रक्रिया मजबूत होगी और केवल गंभीर मामलों में ही आगे कार्रवाई हो सकेगी। इसे पुलिस व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब तुरंत नष्ट नहीं होगा मिलावटी सामान
नई गाइडलाइन के तहत अब मिलावटी दूध, घी, पनीर जैसे खाद्य पदार्थों को तुरंत नष्ट नहीं किया जाएगा। इन्हें सुरक्षित रखा जाएगा और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही नष्ट किया जाएगा। इससे साक्ष्य सुरक्षित रहेंगे और जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
अधिकारियों ने दी प्रतिक्रिया
सहायक आयुक्त खाद्य (द्वितीय) दीनानाथ यादव ने कहा कि विभाग अब नई गाइडलाइन के अनुसार ही कार्य करेगा और मिलावट के मामलों में सीधे FIR की जगह परिवाद दर्ज कराया जाएगा।
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