हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
वैचारिक एजेंडा और अधूरा वादा
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीन प्रमुख वैचारिक मुद्दों में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 का हटाया जाना और समान नागरिक संहिता (UCC) शामिल रहे हैं। मोदी सरकार इन तीन में से दो वादे पूरे कर चुकी है, लेकिन UCC अभी राष्ट्रीय स्तर पर लागू नहीं हो सका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में ‘सेक्युलर सिविल कोड’ की वकालत करते हुए इसे समानता और संविधान की भावना से जोड़ा।
गठबंधन राजनीति बनी बाधा
UCC को लेकर बीजेपी की राह आसान नहीं रही। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार (1998-2004) में सहयोगी दलों के विरोध के कारण इस मुद्दे को पीछे रखना पड़ा। मौजूदा समय में भी नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडु जैसे सहयोगी दल UCC पर व्यापक चर्चा की मांग करते रहे हैं, जिससे केंद्र स्तर पर निर्णय कठिन बना हुआ है।
राज्यों के जरिए नई रणनीति
इन चुनौतियों के बीच बीजेपी ने नई रणनीति अपनाई है—राज्यों के माध्यम से UCC लागू करना। उत्तराखंड जनवरी 2025 में UCC लागू करने वाला पहला राज्य बना, जबकि गुजरात ने मार्च 2026 में इस दिशा में कानून पारित किया। अब असम और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी इसे चुनावी वादों में शामिल किया जा रहा है।
बंगाल में बड़ा चुनावी दांव
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए घोषणापत्र जारी करते हुए सत्ता में आने पर UCC लागू करने का वादा किया है। इससे साफ है कि पार्टी इसे राष्ट्रीय एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा रही है।
केंद्र में गठबंधन की सीमाओं के चलते बीजेपी अब राज्यों के जरिए UCC को लागू करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का लक्ष्य है कि धीरे-धीरे इसे पूरे देश में लागू कर एक समान कानून की व्यवस्था स्थापित की जाए।
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