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उत्तर प्रदेश SIR: वोटर लिस्ट कटौती से बीजेपी में चिंता, कहां चूक गए कार्यकर्ता?

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची में भारी कटौती ने सियासी हलचल तेज कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि जिन सीटों पर पार्टी मजबूत रही, वहीं सबसे ज्यादा वोटर घटे हैं। SIR से पहले प्रदेश में 15.44 करोड़ मतदाता थे, जो घटकर करीब 13.39 करोड़ रह गए—यह आंकड़ा 2014 के लोकसभा चुनाव से भी कम है।

संगठन की निष्क्रियता पर सवाल

वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार के अनुसार, बीजेपी कार्यकर्ता SIR के दौरान सक्रिय नहीं रहे। योगी आदित्यनाथ ने पहले ही निर्देश दिया था कि जिनके नाम कटे हैं, उन्हें दोबारा जोड़ा जाए, लेकिन कार्यकर्ता घर-घर नहीं पहुंचे। वहीं पंकज चौधरी के निर्देशों का भी व्यापक असर नहीं दिखा।

बीजेपी सीटों पर सबसे ज्यादा असर

SIR के आंकड़े बताते हैं कि 1 लाख से ज्यादा वोट कटने वाली 16 सीटों में 15 बीजेपी के कब्जे वाली हैं। कई जगहों पर 30% से अधिक गिरावट दर्ज की गई। अयोध्या में 20% वोट कम हुए, जबकि लखनऊ कैंट सीट पर करीब 33% मतदाता घटे। इसके उलट समाजवादी पार्टी (सपा) की सीटों पर गिरावट अपेक्षाकृत कम रही।

महिला वोटरों में सबसे बड़ी गिरावट

‘नारी वंदन’ के नारों के बीच महिलाओं के वोट सबसे ज्यादा कटे। पहले 7.21 करोड़ महिला मतदाता थे, जो घटकर 6.09 करोड़ रह गए—यानी 1.12 करोड़ की कमी। पुरुषों के मुकाबले यह गिरावट ज्यादा होने से राजनीतिक रणनीति पर असर पड़ सकता है।

शहरी इलाकों में ज्यादा असर

कटौती का सबसे बड़ा असर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में देखा गया, जहां बीजेपी का प्रभाव ज्यादा रहा है। इसके विपरीत ग्रामीण और मुस्लिम बहुल जिलों में अपेक्षाकृत कम वोट कटे, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलने की आशंका है।

बीजेपी में आंतरिक कलह की चर्चा

विश्लेषकों का मानना है कि SIR ने बीजेपी के भीतर समन्वय की कमी और आंतरिक कलह को उजागर किया है। कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और संगठनात्मक कमजोरी पार्टी के लिए आने वाले चुनावों में चुनौती बन सकती है।

सरकार का पक्ष

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और वैध मतदाताओं के नाम अब भी जोड़े जा सकते हैं। उन्होंने इसे किसी दल से जोड़ने से इनकार किया।


SIR के बाद बदली मतदाता सूची उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। खासकर बीजेपी के लिए यह संकेत है कि संगठनात्मक स्तर पर सक्रियता बढ़ानी होगी, वरना चुनावी असर साफ दिख सकता है।

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