हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में छात्र राजनीति का सबसे बड़ा पर्व माने जाने वाले डीयू स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार 52 कॉलेजों और विभागों के लगभग 2.75 लाख छात्र-छात्राएं वोट डालेंगे। मतदान 18 सितंबर को होगा और मतगणना के बाद 19 सितंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे। छात्र संगठन इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न मानते हुए मैदान में उतर चुके हैं और कैंपस का माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंगा नजर आ रहा है।
चुनाव चार प्रमुख पदों — अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव — के लिए होंगे। इस बार के चुनावी मुद्दों में फीस में राहत, छात्रावासों की कमी, कैंपस में महिलाओं की सुरक्षा, परिवहन सुविधा और नई शिक्षा नीति (NEP) से जुड़ी दिक्कतें प्रमुख हैं। छात्र संगठन एबीवीपी, एनएसयूआई, आईसा और अन्य गुट इन मुद्दों को लेकर छात्रों से सीधा संवाद कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बार चुनावी आचार-संहिता को और कड़ा कर दिया है। उम्मीदवारों को नामांकन के साथ ₹1 लाख का बांड जमा करना अनिवार्य होगा। यदि चुनाव के दौरान नियमों का उल्लंघन होता है, तो यह राशि जब्त कर ली जाएगी। साथ ही, प्रचार सामग्री पर भी सख्त नियंत्रण लगाया गया है। केवल तय स्थानों पर पोस्टर और बैनर लगाने की अनुमति दी गई है तथा कैंपस की दीवारों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
हालांकि, इस नियम को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। छात्र संगठन AISA ने इसे दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह प्रावधान आर्थिक रूप से कमजोर तबके के छात्रों को चुनाव लड़ने से रोकता है और छात्र राजनीति को सिर्फ संपन्न वर्ग तक सीमित कर देगा।
इन सबके बावजूद, कैंपस में उत्साह चरम पर है। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पहली बार वोट डालने जा रहे हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार के चुनाव से छात्र राजनीति में नए मुद्दे और नई दिशा सामने आएगी।













