हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
प्रधानमंत्री Narendra Modi के ताज़ा इजराइल दौरे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इस छोटे से देश की असली ताकत क्या है। लगभग 22 हजार वर्ग किमी क्षेत्रफल और करीब एक करोड़ की आबादी वाला Israel चारों ओर सुरक्षा चुनौतियों से घिरा रहा है। बावजूद इसके, इसने तकनीक, रक्षा, कृषि और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई है। इजराइल आज ऐसा देश है जिसे दोस्त भी गंभीरता से लेते हैं और विरोधी भी हल्के में नहीं आंकते।
डिफेंस टेक्नोलॉजी: सुरक्षा ही सर्वोच्च प्राथमिकता
इजराइल की सबसे बड़ी ताकत उसकी रक्षा तकनीक मानी जाती है। लगातार सुरक्षा खतरों के बीच इस देश ने अत्याधुनिक हथियार और सुरक्षा प्रणाली विकसित की। ‘आयरन डोम’ मिसाइल रक्षा प्रणाली दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखती है। उन्नत ड्रोन, सटीक रडार और मिसाइल सिस्टम ने इजराइल को तकनीकी बढ़त दी है। भारत भी इजराइल से बराक-8 जैसी मिसाइल प्रणालियां खरीद चुका है।
यहां सैन्य सेवा अनिवार्य है, जिससे नागरिकों में अनुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित होती है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ने इजराइल को रणनीतिक मजबूती दी है।
रेगिस्तान में खेती: नवाचार का कमाल
पानी की कमी और सीमित कृषि भूमि के बावजूद इजराइल ने खेती में क्रांति लाई। ड्रिप इरिगेशन तकनीक ने पानी की खपत को 30-40 प्रतिशत तक कम किया। सेंसर आधारित कृषि प्रणाली यह तय करती है कि पौधों को कितनी नमी चाहिए। खारे पानी को मीठा बनाने और पुनर्चक्रण की तकनीक ने जल संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया।
आज भारत के कई राज्यों में इजराइली तकनीक से खेती हो रही है। कम संसाधनों में अधिक उत्पादन का मॉडल इजराइल की बड़ी उपलब्धि है।
डायमंड ट्रेड: चमकता हुआ आर्थिक स्तंभ
इजराइल दुनिया के प्रमुख हीरा व्यापार केंद्रों में शामिल है। तेल अवीव का डायमंड एक्सचेंज वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। कच्चे हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग में इजराइल की विशेषज्ञता मानी जाती है। भारत के सूरत और इजराइल के बीच हीरा व्यापार गहरे संबंधों पर आधारित है।
डायमंड उद्योग हजारों लोगों को रोजगार देता है और निर्यात आय का बड़ा स्रोत है। हालांकि समय के साथ हाई-टेक सेक्टर का महत्व और बढ़ गया है।
इनोवेशन नेशन: स्टार्टअप की राजधानी
इजराइल को “स्टार्टअप नेशन” कहा जाता है। प्रति व्यक्ति स्टार्टअप की संख्या दुनिया में सबसे अधिक मानी जाती है। साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एग्री-टेक में यह अग्रणी है। दुनिया की बड़ी कंपनियां—इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल—यहां अपने रिसर्च सेंटर संचालित करती हैं।
इजराइल अपनी जीडीपी का बड़ा हिस्सा रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च करता है। कुल निर्यात में हाई-टेक सेक्टर की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत तक है। यही बौद्धिक पूंजी उसकी असली ताकत बन चुकी है।
जल प्रबंधन और शिक्षा: विकास की नींव
इजराइल इस्तेमाल किए गए लगभग 90 प्रतिशत पानी को रीसायकल करता है, जो विश्व में सबसे अधिक है। समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने की तकनीक ने उसे जल संकट से उबारा। जल संरक्षण में भारत और इजराइल के बीच सहयोग बढ़ रहा है।
शिक्षा और शोध इजराइल की सफलता का आधार हैं। विज्ञान और गणित पर विशेष जोर, विश्वविद्यालयों में उच्च स्तरीय अनुसंधान और शोध को उद्योग से जोड़ने की नीति ने इसे नवाचार केंद्र बनाया। कई नोबेल पुरस्कार विजेता भी इजराइल से जुड़े रहे हैं।
भारत-इजराइल साझेदारी: भरोसे का रिश्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंधों ने दोनों देशों की दोस्ती को नई ऊंचाई दी है। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, रक्षा सौदे, कृषि, जल संरक्षण और अंतरिक्ष विज्ञान में संयुक्त परियोजनाएं इस रिश्ते को और मजबूत बना रही हैं।
आंकड़े जो कहानी कहते हैं
इजराइल की जीडीपी 500 अरब डॉलर से अधिक है। प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों के बराबर है। हाई-टेक सेक्टर जीडीपी में लगभग 15 प्रतिशत योगदान देता है। सैन्य बजट भी जीडीपी का उल्लेखनीय हिस्सा है। औसत जीवन प्रत्याशा 82 वर्ष से अधिक है।
असली ताकत उसके लोग
इजराइल की असली ताकत किसी एक क्षेत्र में नहीं, बल्कि बहुआयामी विकास में है। रक्षा, कृषि, डायमंड व्यापार, इनोवेशन, जल प्रबंधन और शिक्षा—इन सभी का संयोजन इसे मजबूत बनाता है। संघर्षों के बीच उभरा यह देश साबित करता है कि सीमित संसाधन भी बाधा नहीं बनते, यदि नेतृत्व दूरदर्शी और समाज नवाचारी हो।
पीएम मोदी का दौरा इस मजबूत साझेदारी और साझा मूल्यों की पुष्टि करता है। भविष्य में भारत और इजराइल की दोस्ती वैश्विक मंच पर नई संभावनाएं खोल सकती है।
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