हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
दिल्ली के लाल किला इलाके में हुए धमाके की जांच अब शिक्षा जगत तक पहुंच गई है। फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी के वित्तीय लेनदेन और वहां से निकले कुछ डॉक्टरों की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर NIA, ED और EOW ने कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार ने यूनिवर्सिटी की फंडिंग का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दिया है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कहीं आतंकियों को आर्थिक मदद तो नहीं मिली।
जांच एजेंसियों को कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे यूनिवर्सिटी के खातों और उससे जुड़े डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। EOW को यूनिवर्सिटी के संचालन से जुड़ी सभी फाइलों और लेनदेन की जांच सौंपी गई है। वहीं ED विदेशी फंडिंग और हवाला नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
जांच के दायरे में दो डॉक्टर आए हैं — डॉ. फारूक, जो हापुड़ के जीएस मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थे और अल फलाह यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस व एमडी की पढ़ाई कर चुके हैं, तथा डॉ. मोहम्मद आरिफ, जिन्हें कानपुर से हिरासत में लिया गया। पहले पकड़े गए आरोपी परवेज अंसारी से मिली जानकारी के आधार पर इन दोनों को गिरफ्तार किया गया।
एजेंसियों को संदेह है कि ये सभी शिक्षित लोग एक ‘व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल’ का हिस्सा हैं, जिनके तार जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े हो सकते हैं। अब जांच का केंद्रबिंदु यूनिवर्सिटी की फंडिंग और इस नेटवर्क के संभावित स्रोत बन गए हैं।













