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अगर हमास ने हथियार नहीं छोड़े और अपने वादों को पूरा नहीं किया तो उसका अंत तय है-ट्रंप

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ‘बोर्ड ऑफ पीस चार्टर’ में भाग लिया और इस पर हस्ताक्षर किए। इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का समाधान निकालना और वैश्विक स्तर पर शांति की स्थापना करना है। ट्रंप ने मंच से दावा किया कि इस बोर्ड का हिस्सा बनने की इच्छा लगभग हर देश की है और यह पहल सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है।

क्या है बोर्ड ऑफ पीस?

बोर्ड ऑफ पीस एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसका गठन संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के लिए किया गया है। इस बोर्ड का स्थायी सदस्य बनने के लिए एक अरब डॉलर (लगभग 8,300 करोड़ रुपये) का शुल्क तय किया गया है। ट्रंप के अनुसार, यह बोर्ड वैश्विक कूटनीति में एक नई दिशा तय करेगा और बड़े संघर्षों को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाएगा।

मिडिल ईस्ट को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “यह हमारी सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक है, जिसे बोर्ड ऑफ पीस के नाम से जाना जाता है। यह गाजा पीस बोर्ड के आधिकारिक गठन का मौका है। मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित हो चुकी है। किसी ने नहीं सोचा था कि ऐसा संभव होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि उनकी पहल से अब तक आठ युद्ध रुकवाए जा चुके हैं और एक और युद्ध जल्द समाप्त होने की उम्मीद है। ट्रंप ने यूक्रेन-रूस युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले महीने इसमें 29 हजार लोग मारे गए, जिनमें अधिकतर सैनिक थे।

हमास को ट्रंप की चेतावनी

फोरम के दौरान ट्रंप ने हमास को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर संगठन ने हथियार नहीं छोड़े और अपने वादों को पूरा नहीं किया तो उसका अंत तय है। उन्होंने कहा कि हमास हिंसा के साथ पैदा हुआ है और अब शांति का रास्ता चुनना ही उसका एकमात्र विकल्प है। ट्रंप ने दावा किया कि इस शांति पहल में 59 देश शामिल हो रहे हैं, जिससे बोर्ड को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल रहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी दावोस में शांति बोर्ड सम्मेलन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप शांति के लिए किसी से भी बातचीत करने को तैयार हैं। रुबियो ने गाजा में बंधक बनाए गए लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले किसी को उम्मीद नहीं थी कि इस समस्या का कोई समाधान निकल पाएगा, लेकिन अब रास्ते खुलते दिख रहे हैं।

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