नई दिल्ली,हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
इस वर्ष धनतेरस पर भारतीय निवेशकों की जबरदस्त चांदी खरीदारी ने विश्व बाजार में हलचल मचा दी है। बीते छह महीनों में चांदी की कीमतों में तेजी ने भारतीयों को आकर्षित किया और धनतेरस के अवसर पर जमकर खरीदारी हुई। नतीजतन, भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी एमएमटीसी-पीएएमपी का चांदी भंडार इतिहास में पहली बार खाली हो गया। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संकट का कारण बन गई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अभूतपूर्व मांग ने वैश्विक कीमती धातुओं के बाजार को झकझोर दिया है। लंदन जैसे बड़े कारोबारी केंद्रों में बैंकों ने ग्राहकों को चांदी का भाव बताना बंद कर दिया क्योंकि वहां भी चांदी का स्टॉक लगभग समाप्त हो गया। यह स्थिति आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन को स्पष्ट दर्शाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट पिछले 45 वर्षों में सबसे बड़ा माना जा रहा है। कई देशों में रिफाइनरी और बैंकों के पास सीमित भंडार ही बचा है। भारत में चांदी की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे निवेश के साथ-साथ पारंपरिक और धार्मिक कारण भी प्रमुख हैं। धनतेरस जैसे शुभ अवसर पर चांदी की खरीद को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जिससे बाजार में भारी उछाल आया।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि भारत में यह मांग इसी स्तर पर बनी रही तो अंतरराष्ट्रीय कीमतें और बढ़ सकती हैं तथा औद्योगिक क्षेत्र, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर एनर्जी में उपयोग होने वाली चांदी की आपूर्ति पर भी असर पड़ेगा। विशेषज्ञ इसे वैश्विक स्तर पर “सिल्वर शॉर्टेज क्राइसिस” का संकेत मान रहे हैं।
भारत की इस दीवानगी ने एक बार फिर साबित किया है कि भारतीय उपभोक्ता वैश्विक कीमती धातु बाजारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।













