हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की सक्रिय रणनीति
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हालिया युद्धविराम के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। तेल-गैस के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर भारत किसी भी दीर्घकालिक संकट से बचने के लिए वैकल्पिक साझेदारियों पर काम कर रहा है। इसी रणनीति के तहत एक ओर विदेश मंत्री एस जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचे हैं, तो दूसरी ओर विदेश सचिव विक्रम मिसरी यूरोप दौरे पर रवाना हो रहे हैं।
यूएई में ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी पर फोकस
विदेश मंत्री जयशंकर का UAE दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान ऊर्जा आपूर्ति, निवेश और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को लेकर चर्चा होगी। मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के चलते भारत अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित और विविध बनाना चाहता है, ताकि वैश्विक संकट का असर कम हो।
यूरोप में विकल्प तलाशने की कोशिश
विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका दौरे के बाद अब फ्रांस और जर्मनी का तीन दिवसीय दौरा करेंगे। फ्रांस में वे ‘भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श’ की सह-अध्यक्षता करेंगे, जहां रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर और AI जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी।
वहीं जर्मनी में ‘भारत-जर्मनी विदेश कार्यालय परामर्श’ के तहत व्यापार, निवेश, हरित ऊर्जा, तकनीक और शिक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी।
वैश्विक संकट के बीच संतुलन की नीति
भारत की यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय हो रही है जब ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई है। हालांकि स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में भारत अपने हितों की रक्षा के लिए बहुपक्षीय सहयोग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर जोर दे रहा है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, भारत ‘मिशन एनर्जी’ के तहत वैश्विक स्तर पर सक्रिय कूटनीति के जरिए अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में जुटा है, ताकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का घरेलू अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम असर पड़े।
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