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केदारनाथ यात्रा 2025: बीमार घोड़ा-खच्चरों के लिए क्वारंटीन सेंटर, प्रशासन की नई पहल

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 16 अप्रैल: 2025,

2 मई से शुरू हो रही यात्रा के लिए प्रशासन सतर्क

केदारनाथ यात्रा 2025 की शुरुआत आगामी 2 मई से हो रही है, और इस बार प्रशासन ने यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस बार यात्रा मार्ग पर बीमार घोड़ा-खच्चरों को तुरंत क्वारंटीन किया जाएगा, ताकि अन्य जानवर संक्रमण की चपेट में न आएं और यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

कोटमा और फाटा में बनेंगे विशेष क्वारंटीन सेंटर

पशुपालन विभाग ने कोटमा और फाटा में विशेष क्वारंटीन सेंटर स्थापित किए हैं, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 30 जानवरों की होगी। यह पहली बार है जब यात्रा मार्ग पर जानवरों के लिए इतनी सुनियोजित चिकित्सा व्यवस्था की जा रही है।

डॉ. भूपेंद्र जंगपांगी (अपर निदेशक, पशुपालन विभाग देहरादून) ने जानकारी दी कि इन सेंटरों में विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की देखरेख में इलाज किया जाएगा। सात-सदस्यीय डॉक्टरों की टीम को पहले से ही तैनात कर दिया गया है, और आवश्यकता पड़ने पर अन्य स्थानों पर भी अस्थायी क्वारंटीन सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

हॉर्ष फ्लू के मामलों के बाद लिया गया फैसला

प्रशासन का यह कदम हाल की उन घटनाओं के बाद उठाया गया है, जब बीरों, बष्टी, जलई, मनसूना और गौंडार गांवों में कई घोड़ा-खच्चरों में हॉर्ष फ्लू (इक्वाइन इन्फ्लूएंजा) के लक्षण पाए गए थे। गौंडार गांव में तीन खच्चरों की मौत भी इस बीमारी के कारण हो चुकी है।

इसी के चलते पहले घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अब संक्रमण पर काबू पाने के बाद पंजीकरण शिविरों को पुनः शुरू किया गया है।

सिर्फ स्वस्थ जानवर ही होंगे यात्रा में शामिल

पंजीकरण शिविरों में हर जानवर की खून की जांच की जा रही है। केवल हॉर्ष फ्लू और ग्लैंडर्स जैसी बीमारियों से पूरी तरह निगेटिव पाए गए जानवरों को ही केदारनाथ यात्रा में शामिल होने की अनुमति दी जा रही है। यह सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

यात्रियों और जानवरों दोनों की सुरक्षा पर जोर

प्रशासन की यह पहल ना सिर्फ यात्रियों की सुरक्षा, बल्कि घोड़ा-खच्चरों के स्वास्थ्य के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। केदारनाथ यात्रा में घोड़ा-खच्चरों की भूमिका अहम होती है, और उनके स्वास्थ्य की अनदेखी मानव और पशु दोनों के लिए खतरा बन सकती है।

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