हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
इस्लामाबाद, 11 अप्रैल 2026। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए इस्लामाबाद में आज महत्वपूर्ण युद्धविराम वार्ता चल रही है। दो सप्ताह के सीजफायर के ऐलान के बाद शुरू हुई इस बातचीत से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, हालांकि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास अब भी बना हुआ है।

ईरान का अमेरिका पर अविश्वास कायम
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकता। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया कि उनकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद गहरे बने हुए हैं।
शर्तों पर अटका मामला
वार्ता से पहले ईरान ने दो प्रमुख शर्तें रखीं—पहली, विदेशों में फ्रीज की गई उसकी संपत्तियों को बहाल किया जाए और दूसरी, लेबनान में हमले रोके जाएं।
हालांकि व्हाइट हाउस ने इस बात से इनकार किया है कि अमेरिका इन शर्तों को मानने के लिए तैयार है। इससे बातचीत में नया पेच फंस गया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका अहम
पाकिस्तान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की, जिसके बाद अमेरिकी डेलिगेशन भी उनसे मिलने वाला है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने उम्मीद जताई कि दोनों देश शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल सक्रिय
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं।
वहीं ईरान ने अपने प्रतिनिधिमंडल को “मिनाब-168” नाम दिया है, जो हालिया हमलों में मारे गए छात्रों की याद में रखा गया है।
लंबी वार्ता की तैयारी, नतीजों पर नजर
सूत्रों के मुताबिक ईरान लंबी बातचीत के मूड में है, जबकि अमेरिका जल्द परिणाम चाहता है। ऐसे में यह वार्ता कितनी सफल होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल सीजफायर जारी है, लेकिन स्थायी शांति के लिए ठोस समझौता जरूरी होगा।
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