नई दिल्ली।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज: देश में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है—अब फेफड़ों का कैंसर सिर्फ धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं रह गया है। राजधानी दिल्ली की जहरीली हवा, खासकर पीएम 2.5 कण, सिगरेट के धुएं से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे हैं। एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार, हर 10 में से 3 मरीज ऐसे हैं जिन्होंने कभी तंबाकू का सेवन नहीं किया।
पीएम 2.5 पर होगा बड़ा शोध
आंकोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण शोध शुरू किया गया है। इस अध्ययन में पीएम 2.5 के दुष्प्रभावों का गहन विश्लेषण किया जाएगा।
इस शोध के लिए अमेरिका के बीएमएस फाउंडेशन ने फंडिंग दी है। अध्ययन में 1,615 कैंसर मरीजों और इतने ही सामान्य लोगों को शामिल किया जाएगा, जिससे तुलना के जरिए सटीक निष्कर्ष निकाले जा सकें।
बायोमार्कर से होगी कैंसर की जल्दी पहचान
तीन साल तक चलने वाले इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य ‘बायोमार्कर’ की पहचान करना है। इससे प्रदूषण से होने वाले कैंसर की शुरुआती अवस्था में ही पहचान संभव हो सकेगी।
शोध में डॉ. सुनील कुमार, डॉ. रभा पांडे, डॉ. सच्चिदानंद जी भारती, डॉ. चंद्र प्रकाश प्रसाद और डॉ. मयंक सिंह जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं।
युवाओं और महिलाओं में बढ़ता खतरा
डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर देश में चौथा सबसे बड़ा कैंसर है और हर साल करीब 75 हजार लोग इसकी चपेट में आते हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि 30% मरीज ऐसे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। इनमें युवाओं और महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
धूम्रपान न करने वाले मरीजों में यह बीमारी सामान्य मरीजों की तुलना में लगभग 10 साल पहले ही देखने को मिल रही है।
हवा में छिपा कैंसर का खतरा
एम्स में आने वाले मरीजों के आंकड़े साफ बताते हैं कि अब केवल तंबाकू ही नहीं, बल्कि प्रदूषित हवा भी कैंसर का बड़ा कारण बनती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण शरीर में जाकर धीरे-धीरे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को जन्म देते हैं।
यह शोध भविष्य में कैंसर की रोकथाम और समय पर पहचान के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। साथ ही यह भी साफ संकेत देता है कि स्वच्छ हवा अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की जरूरत बन चुकी है।
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