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इनकम टैक्स में अब नहीं होगी जेल … सिर्फ जुर्माना देकर हो जाएगा मामला रफा-दफा, बजट 2026 में बदल गए नियम

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
केंद्रीय बजट 2026-27 से मिडिल क्लास को इनकम टैक्स में सीधी राहत की बड़ी उम्मीद थी। हालांकि टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया, लेकिन सरकार ने टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और कम डरावना बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। बजट का फोकस ईमानदार करदाताओं को तकनीकी भूलों और जटिल नियमों की वजह से परेशान होने से बचाने पर रहा है।

1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया इनकम टैक्स कानून

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि नया इनकम टैक्स कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स फाइलिंग को आसान बनाना, मुकदमेबाजी कम करना और छोटे मामलों में जेल जैसी सख्त कार्रवाई से बचना है। सरकार का मानना है कि इससे करदाताओं और विभाग के बीच विश्वास बढ़ेगा।

एनआरआई के लिए प्रॉपर्टी बेचना हुआ आसान

बजट में एनआरआई को बड़ी राहत दी गई है। अब भारत में संपत्ति बेचने पर एनआरआई को टीडीएस के लिए अलग से TAN लेने की जरूरत नहीं होगी। नई व्यवस्था के तहत प्रॉपर्टी खरीदने वाला भारतीय खरीदार ही टीडीएस काटेगा और अपने PAN के जरिए सरकार के पास जमा करेगा। इससे एनआरआई को अतिरिक्त कागजी कार्रवाई से छुटकारा मिलेगा।

विदेशी संपत्ति के खुलासे में नरमी

बजट 2026 में विदेशी आय और संपत्ति से जुड़े नियमों में भी राहत दी गई है। यदि किसी एनआरआई की विदेश में रखी गैर-अचल संपत्ति की कुल कीमत 20 लाख रुपये से कम है और उसका खुलासा नहीं हुआ है, तो उस पर कोई दंड या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी। यह राहत 1 अक्टूबर 2024 से प्रभावी मानी जाएगी।

छुपी आय के मामलों में सेटलमेंट का विकल्प

सरकार ने छुपी विदेशी आय या संपत्ति के मामलों में सेटलमेंट का रास्ता खोला है। 1 करोड़ रुपये तक की छुपी आय या संपत्ति पर 30 प्रतिशत टैक्स और 30 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देकर मामला निपटाया जा सकेगा। वहीं, जिन मामलों में विदेशी आय बताई गई है लेकिन संपत्ति घोषित नहीं हो पाई, वहां 5 करोड़ रुपये तक की सीमा में केवल 1 लाख रुपये का शुल्क देकर कानूनी राहत मिलेगी।

तकनीकी गलतियों पर अब जेल नहीं

नए टैक्स नियमों में ‘डिक्रिमिनलाइजेशन’ पर जोर दिया गया है। अकाउंट्स का ऑडिट न कराना, ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट न देना या जानकारी देने में चूक जैसी तकनीकी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा रहा है। ऐसे मामलों में अब जेल की जगह मामूली शुल्क लगेगा।

अपील और जुर्माने के नियम हुए सरल

टैक्स विवाद कम करने के लिए कई प्रक्रियात्मक बदलाव किए गए हैं। अपील के दौरान जुर्माने पर ब्याज नहीं लगेगा। अग्रिम जमा राशि 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है। पुनर्मूल्यांकन के बाद भी रिटर्न अपडेट करने का मौका मिलेगा, जिसमें 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स देना होगा।

जेल की सजा लगभग खत्म

नए इनकम टैक्स एक्ट में छोटे मामलों में सिर्फ जुर्माने का प्रावधान होगा। गंभीर मामलों में भी अधिकतम सजा घटाकर 2 साल कर दी गई है, जिसे अदालत जुर्माने में बदल सकती है। इसे ईमानदार करदाताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

ITR फाइलिंग की नई समय-सीमा

नए नियमों के अनुसार ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई रहेगी, जबकि गैर-ऑडिट व्यापार मामलों और ट्रस्टों को 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।

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