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अलीगढ़-खैर-जट्टारी-पलवल हाईवे की बदहाल स्थिति पर उठी आवाज, केंद्रीय मंत्री व डीएम से शीघ्र कार्रवाई की मांग

अलीगढ़, 26 मार्च 2026।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अलीगढ़ से खैर, जट्टारी होते हुए पलवल तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग NH-334D की जर्जर हालत और लगातार लगने वाले जाम को लेकर एक बार फिर जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की चिंता सामने आई है।पूर्व विधायक एवं विधान परिषद सदस्य मुकुल उपाध्याय ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा जिलाधिकारी अलीगढ़ को पत्र लिखकर इस महत्वपूर्ण मार्ग की खराब स्थिति, धीमी विकास परियोजनाओं और यातायात अव्यवस्था पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है।

यात्रा के दौरान सामने आई सड़क की हकीकत

मुकुल उपाध्याय ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि हाल ही में अलीगढ़ आगमन के दौरान जब वह टप्पल मार्ग से होकर गुजरे, तो टप्पल से जट्टारी, खैर होते हुए अलीगढ़ तक पूरा मार्ग बड़े-बड़े गड्ढों से भरा हुआ मिला। यह सड़क, जिसे राज्य मार्ग 334-डी के नाम से भी जाना जाता है, अत्यंत खराब स्थिति में है।
उन्होंने बताया कि इस मार्ग पर यात्रा करते समय लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है और सड़क की हालत देखकर उनका हृदय व्यथित हो उठा।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की धीमी रफ्तार पर सवाल

पत्र में यह भी कहा गया है कि इसी मार्ग पर परिवहन मंत्रालय द्वारा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन इसकी गति बेहद धीमी है। उन्होंने इसे “कछुए की चाल से भी धीमा” बताते हुए निर्माण कार्य में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह एक्सप्रेसवे अलीगढ़ से पलवल तक लगभग 32 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित है, जो यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़कर दिल्ली-एनसीआर तक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा।

खैर और जट्टारी में जाम बना बड़ी समस्या

खैर और जट्टारी कस्बों के भीतर सड़क की चौड़ाई कम होने और बाईपास के अभाव के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
स्थिति यह है कि सामान्य दिनों में भी वाहन रेंगते रहते हैं, जबकि शादी-विवाह के सीजन (सहालग) में तो घंटों तक जाम लगा रहता है। कई बार वाहन चालकों को मजबूरी में वापस लौटना पड़ता है।
इससे न केवल आम नागरिक बल्कि व्यापारी, विद्यार्थी और आपातकालीन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

बाईपास परियोजना: कागजों से जमीन तक का सफर अधूरा

खैर-जट्टारी बाईपास परियोजना को लेकर कुछ प्रगति जरूर हुई है।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा तैयार की गई डीपीआर को शासन की मंजूरी मिल चुकी है। योजना के तहत खैर में 10 किलोमीटर और जट्टारी में 5.5 किलोमीटर लंबा फोरलेन बाईपास बनाया जाना है।
इस परियोजना के लिए 29 गांवों की जमीन चिन्हित की गई है, जिनमें से 17 गांवों का अवार्ड भी घोषित किया जा चुका है।
हालांकि, इसके बावजूद निर्माण कार्य अभी तक धरातल पर तेजी से शुरू नहीं हो सका है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

नोएडा और जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी पर असर

यह मार्ग अलीगढ़ को नोएडा और जेवर एयरपोर्ट से जोड़ने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
वर्तमान में बिना जाम के भी नोएडा के परी चौक तक पहुंचने में करीब दो घंटे लग जाते हैं। अगर जाम मिल जाए तो समय का कोई अनुमान नहीं रहता।
बाईपास और एक्सप्रेसवे बनने के बाद यही दूरी एक घंटे में तय होने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी और निवेश के अवसर भी बढ़ेंगे।

सड़क की खराब हालत से बढ़ रहा दुर्घटनाओं का खतरा

NH-334D की मौजूदा स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि खतरनाक भी बन चुकी है।
बड़े-बड़े गड्ढों और खराब सड़क के कारण आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इससे लोगों की जान-माल की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से मरम्मत न होने के कारण स्थिति दिन-ब-दिन और खराब होती जा रही है।

प्रशासन और सरकार से की गई प्रमुख मांगें

मुकुल उपाध्याय ने अपने पत्र के माध्यम से केंद्र और जिला प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं—

  1. खैर और जट्टारी बाईपास का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कर उसे जल्द पूरा किया जाए।
  2. अलीगढ़-पलवल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को प्राथमिकता देते हुए तेजी से आगे बढ़ाया जाए।
  3. NH-334D की तत्काल मरम्मत, गड्ढों की भराई और सड़क का सुदृढ़ीकरण कराया जाए।
  4. यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए अस्थायी और वैकल्पिक प्रबंध किए जाएं।
जनता में बढ़ता असंतोष, समाधान की उम्मीद

लगातार खराब सड़क और जाम की समस्या से क्षेत्र की लाखों जनता परेशान है। इससे न केवल दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई यह मांग अब प्रशासन और सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और लोगों को राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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