हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम देश की ऊर्जा तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में अमित शाह, राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण, एस जयशंकर, जेपी नड्डा और हरदीप सिंह पुरी सहित कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए।
ऊर्जा आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स पर चर्चा
बैठक में पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक सेक्टर की मौजूदा स्थिति का आकलन किया गया। एलपीजी वितरण, उर्वरक उपलब्धता और देशभर में निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। सरकार का फोकस स्थिर लॉजिस्टिक्स और बेहतर वितरण प्रणाली बनाए रखने पर है, ताकि आम उपभोक्ताओं और उद्योगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
मिडिल ईस्ट संकट का असर
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में गतिरोध से तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है। इस मार्ग पर ईरान के नियंत्रण और सीमित जहाजों की आवाजाही से भारत समेत कई देशों पर असर पड़ा है।
वैश्विक स्तर पर संपर्क और रणनीति
प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, मलेशिया, इजराइल और ईरान के नेताओं से बातचीत कर हालात पर चर्चा की है। सरकार अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आई बाधाओं को दूर करने और वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में जुटी है।
ऊर्जा संकट को बताया बड़ी चुनौती
प्रधानमंत्री ने मिडिल ईस्ट के हालात को वैश्विक ऊर्जा संकट का प्रमुख कारण बताते हुए इसे भारत के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा करार दिया है। उन्होंने कहा कि शांति, धैर्य और जागरूकता के साथ इस चुनौती का सामना करना होगा।
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