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नई दिल्ली: आश्रम फ्लाईओवर की दोषपूर्ण री-डिजाइनिंग पर उठे सवाल, दिल्ली सरकार ने मांगी जवाबदेही

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़: 8 मई : 2025,

नई दिल्ली।
राष्ट्रीय राजधानी में आश्रम फ्लाईओवर के विस्तार को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्देश दिए हैं कि वह यह स्पष्ट करे कि फ्लाईओवर का डीएनडी फ्लाईवे तक विस्तार करते समय आसपास के अतिक्रमणों को ध्यान में क्यों नहीं रखा गया। निर्माण कार्य के दौरान डिजाइन में अचानक किए गए बदलाव और इसके चलते लागत में भारी वृद्धि को लेकर विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

विस्तारित आश्रम फ्लाईओवर को मार्च 2023 में यातायात के लिए खोला गया था। लेकिन अब, इस प्रोजेक्ट की योजना, क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

परियोजना की लागत में 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी

मूल रूप से 259 मीटर लंबे इस फ्लाईओवर के विस्तार के लिए 129 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था। लेकिन निर्माण के दौरान अतिक्रमण बचाने के लिए दीवार के बजाय पिलर लगाने पड़े, जिससे न केवल डिज़ाइन में बड़ा बदलाव हुआ बल्कि इसकी लागत भी 45% बढ़कर लगभग 185 करोड़ रुपये हो गई।

इस बदलाव का कारण “निर्माण कार्य के दायरे में परिवर्तन” बताया गया है, जिसकी जानकारी दिल्ली के इंजीनियर-इन-चीफ द्वारा हाल ही में व्यय वित्त समिति (EFC) को दी गई।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में टला निर्णय

दिल्ली की वित्त मंत्री और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में EFC ने इस बढ़ी हुई लागत को मंजूरी देने से फिलहाल इंकार कर दिया है। समिति ने यह स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य से पहले अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए था और यातायात विभाग से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी प्राप्त नहीं किया गया।

इसके अलावा, परियोजना की शुरुआत में देरी और अनुबंध संबंधित शर्तों में बदलाव के कारण भी लागत में इजाफा हुआ। समिति ने पीडब्ल्यूडी से पूछा है कि अतिक्रमण की जानकारी उन्हें कब मिली – परियोजना से पहले, निविदा दस्तावेज तैयार करते समय, या बोलियां आमंत्रित करने के बाद?

लंबित बिल और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा

इस परियोजना से जुड़े कुछ बिलों का भुगतान अब तक नहीं किया गया है, जो सरकारी प्रक्रिया में लापरवाही को दर्शाता है। समिति ने पीडब्ल्यूडी को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि अतिक्रमण पहली बार कब देखा गया था और उस पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यदि दोषियों की पहचान होती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

क्या कहती है सरकार?

सरकार ने फिलहाल इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान देने से परहेज किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इस मामले को गंभीरता से ले रही हैं और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के पक्ष में हैं।

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