हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
भारतीय जनता पार्टी के सांसद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राधा मोहन दास अग्रवाल ने संसद में बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जो अपने मां-बाप को भारत में असहाय और तड़पता छोड़कर विदेशों में सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पासपोर्ट रद्द करने का प्रस्ताव
सांसद ने सुझाव दिया कि जो संतान अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल नहीं करती और उन्हें अकेला छोड़ देती है, उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद यदि कोई अपने माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं निभाता, तो उसे विदेश में रहने या यात्रा करने का नैतिक अधिकार नहीं होना चाहिए।
हर छह महीने में ‘संतुष्टि प्रमाण पत्र’ की मांग
राधा मोहन दास अग्रवाल ने यह भी प्रस्ताव रखा कि जिन बच्चों के माता-पिता भारत में रह रहे हैं और वे स्वयं विदेश में हैं, उनसे हर छह महीने पर माता-पिता के माध्यम से एक “संतुष्टि प्रमाण पत्र” लिया जाना चाहिए। इस प्रमाण पत्र में यह दर्ज हो कि माता-पिता अपने बच्चों की देखभाल और व्यवहार से संतुष्ट हैं।
कानून को और सख्त बनाने की वकालत
उन्होंने ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम’ को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि वर्तमान कानून होने के बावजूद कई बुजुर्ग न्याय और देखभाल से वंचित रह जाते हैं। इसलिए कानून में ऐसे प्रावधान जोड़े जाएं, जिनसे संतान की जवाबदेही तय हो सके।
सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर
अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता की सेवा सर्वोच्च कर्तव्य माना गया है। आधुनिक जीवनशैली और विदेश पलायन के कारण पारिवारिक मूल्यों में गिरावट आई है, जिसे रोकने के लिए कठोर नीतिगत कदम जरूरी हैं।
सांसद का यह बयान सामाजिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि इसमें प्रवासी भारतीयों की जिम्मेदारी और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण को लेकर कड़ा रुख अपनाने की बात कही गई।















