हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
देशभर में बढ़ती कुत्तों के काटने की घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से सभी लावारिस कुत्तों को हटाकर आश्रय स्थलों (शेल्टर होम) में रखा जाए। साथ ही, इन क्षेत्रों के आसपास बाड़ लगाने के निर्देश दिए गए ताकि कुत्ते दोबारा प्रवेश न कर सकें। अदालत ने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने का भी आदेश दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह जिम्मेदारी स्थानीय निकायों और नगर निगमों की होगी। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि कुत्तों का टीकाकरण और बाध्याकरण (नसबंदी) करने के बाद उन्हें आश्रय स्थलों में रखा जाए, न कि पहले वाली जगहों पर छोड़ा जाए। अदालत ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दो सप्ताह के भीतर ऐसे संस्थागत क्षेत्रों की पहचान करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से सही ठहराते हुए यह आदेश जारी किया। साथ ही एक्सप्रेस-वे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर जानवरों से हो रहे हादसों पर चिंता जताई और केंद्र व राज्य सरकारों को ऐसे क्षेत्रों से जानवरों को तुरंत हटाने का निर्देश दिया। इसके लिए राजमार्ग गश्ती दल बनाए जाएंगे जो 24 घंटे सक्रिय रहेंगे और संबंधित पुलिस थानों व नगर निगमों के साथ समन्वय करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में हर समय एंटी-रेबीज टीके और इम्युनोग्लोबुलिन का स्टॉक अनिवार्य रूप से रखा जाए। शिक्षा मंत्रालय को आदेश दिया गया कि सभी स्कूल और कॉलेजों में छात्रों व कर्मचारियों के लिए कुत्तों के काटने से बचाव पर जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएं।
पेटा इंडिया के अनुसार, देशभर में एक करोड़ से अधिक आवारा कुत्ते सड़कों पर घूम रहे हैं। वहीं, दिल्ली में एक वर्ष में 42,000 से अधिक कुत्तों के काटने के केस दर्ज किए गए। अलीगढ़ में ही करीब 60 हजार आवारा कुत्ते हैं, जो हर महीने 100 से अधिक लोगों को काटते हैं। जिले में 143 गौआश्रय स्थल हैं और 31 हजार से अधिक गौवंश संरक्षित हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से आठ सप्ताह के भीतर उठाए गए कदमों पर हलफनामा दायर करने को कहा है।














