हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
तनाव के बीच अहम समुद्री रास्ता अब भी बंद
Strait of Hormuz को खोलने में लगातार देरी हो रही है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Iran खुद अपने बिछाए समुद्री माइंस को ढूंढ और हटाने में संघर्ष कर रहा है। माइंस, ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है, जिससे भारत समेत कई देशों में ऊर्जा संकट गहराने लगा है।

क्यों बिछाई गई थीं माइंस?
जानकारी के मुताबिक, ईरान ने समुद्र और तटीय इलाकों में माइंस इसलिए बिछाई थीं ताकि United States और खाड़ी देशों पर दबाव बनाया जा सके। यह कदम अपने ऊपर हो रहे संभावित हमलों को रोकने की रणनीति का हिस्सा था। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल ट्रांजिट रूट्स में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है।
माइंस हटाना क्यों बना चुनौती?
रिपोर्ट बताती है कि ईरान ने माइंस को व्यवस्थित तरीके से नहीं लगाया, जिससे अब उनकी सटीक लोकेशन पता करना मुश्किल हो गया है। कई माइंस समुद्री धाराओं के कारण बहकर अपनी जगह बदल चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, माइंस बिछाने से ज्यादा कठिन उन्हें हटाना होता है। यहां तक कि उन्नत तकनीक रखने वाले देशों के लिए भी यह जोखिम भरा और समय लेने वाला काम है।
सीमित तकनीक बनी बड़ी बाधा
ईरान के पास माइंस को ट्रैक और निष्क्रिय करने की पर्याप्त तकनीक नहीं है। आमतौर पर इसके लिए विशेष जहाज और उन्नत उपकरणों की जरूरत होती है, जिनकी कमी ईरान को भारी पड़ रही है। यही वजह है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद इस जलमार्ग को जल्दी खोलने में सक्षम नहीं हो पा रहा।
शांति वार्ता में भी प्रमुख मुद्दा
इस बीच Donald Trump ने होर्मुज को खोलना युद्ध समाप्ति की अहम शर्त बताया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान तुरंत रास्ता खोले, जबकि ईरान इस पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है। हालिया युद्धविराम के बावजूद स्थिति अब भी सामान्य नहीं हो पाई है।
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