हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
माधौगढ़ से आशीष पांडेय को बनाया प्रत्याशी
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मायावती ने चुनावी तैयारियों की शुरुआत करते हुए पहला टिकट ब्राह्मण नेता आशीष पांडेय को दिया है। उन्हें जालौन जिले की माधौगढ़ सीट से प्रत्याशी घोषित किया गया है। साथ ही उन्हें सीट का प्रभारी भी बनाया गया है। माधौगढ़ को बहुजन समाज पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। वर्ष 2017 के चुनाव में पार्टी यहां दूसरे स्थान पर रही थी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार होली के बाद कानपुर मंडल की पांच और सीटों पर प्रभारियों की घोषणा की जाएगी। आमतौर पर बीएसपी चुनाव की तारीख घोषित होने से पहले जिन नेताओं को प्रभारी बनाती है, वही बाद में प्रत्याशी बनाए जाते हैं।
ब्राह्मण समाज को साधने की रणनीति
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती लंबे समय से ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश में जुटी हैं। हाल ही में पार्टी की बैठक के बाद उन्होंने कहा था कि भाजपा सरकार में सभी वर्ग परेशान हैं, लेकिन उपेक्षा और असम्मान के मुद्दे पर ब्राह्मण समाज अधिक मुखर है।
मायावती ने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान ब्राह्मणों को जितना सम्मान, पद और सुरक्षा मिली, उतनी किसी अन्य दल ने नहीं दी। उन्होंने संकेत दिया कि बीएसपी सामाजिक संतुलन और सम्मान की राजनीति में विश्वास रखती है।
‘घूसखोर पंडत’ विवाद पर जताई नाराजगी
हाल ही में ‘घूसखोर पंडत’ नामक फिल्म को लेकर भी मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा कि फिल्मों में ‘पंडित’ शब्द को घूसखोर जैसे शब्दों से जोड़कर पूरे ब्राह्मण समाज का अपमान किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से ऐसी जातिसूचक फिल्मों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की।
जन्मदिन पर भी उठाया ब्राह्मणों का मुद्दा
15 जनवरी को अपने 70वें जन्मदिन पर मायावती ने कहा था कि बीएसपी ने हमेशा ब्राह्मण समाज को सम्मान और प्रतिनिधित्व दिया है। उन्होंने बताया कि शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा, सपा और कांग्रेस से जुड़े कई ब्राह्मण नेताओं ने उनसे मुलाकात कर अपने समुदाय की उपेक्षा पर चिंता जताई थी। मायावती ने अपने शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार में दलितों के साथ-साथ अन्य समुदायों के लिए भी व्यापक काम हुए।
2007 की सोशल इंजीनियरिंग दोहराने की तैयारी
साल 2007 में मायावती ने दलित-ब्राह्मण सोशल इंजीनियरिंग के दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। उस समय “हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा-विष्णु महेश है” जैसे नारों के जरिए ब्राह्मण मतदाताओं को जोड़ा गया था। अब एक बार फिर वही रणनीति अपनाकर बीएसपी 2027 में सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है।
मायावती पहले ही ऐलान कर चुकी हैं कि उनकी पार्टी आगामी चुनाव अकेले लड़ेगी। ऐसे में ब्राह्मण और दलित समीकरण पर आधारित यह रणनीति चुनावी राजनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।
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