हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
ट्रेनिंग सेंटर में मिला विवादित निशान
United States Coast Guard के न्यू जर्सी के केप मे स्थित ट्रेनिंग सेंटर में बाथरूम की दीवार पर बना एक विवादित निशान मिलने से हड़कंप मच गया। एक इंस्ट्रक्टर ने इसे देखा और तुरंत अधिकारियों को सूचना दी। निशान जर्मनी के तानाशाह Adolf Hitler के नाजी प्रतीक जैसा प्रतीत हो रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे तुरंत मिटाया गया और जांच Coast Guard Investigative Service (CGIS) को सौंप दी गई। करीब 900 रिक्रूट और स्टाफ से बातचीत कर स्पष्ट संदेश दिया गया कि नफरत या चरमपंथी विचारधारा के लिए संस्था में कोई जगह नहीं है।

पश्चिम में नफरत का प्रतीक क्यों?
20वीं सदी में हिटलर और उसकी नाजी पार्टी ने स्वास्तिक जैसी आकृति को अपने झंडे का केंद्र बनाया। 1920 में बने नाजी ध्वज में लाल, सफेद और काले रंग के साथ यह चिन्ह शामिल था। नाजी शासन के दौरान लाखों यहूदियों के नरसंहार और द्वितीय विश्व युद्ध की भयावह घटनाओं के कारण यह प्रतीक पश्चिमी देशों में नस्लवाद, हिंसा और घृणा से जुड़ गया। आज वहां यह सिर्फ एक आकृति नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दर्द की याद दिलाने वाला चिन्ह है।
भारत में आस्था और मंगल का चिन्ह
स्वास्तिक नाजी प्रतीक से हजारों वर्ष पुराना है। संस्कृत में ‘स्वस्तिक’ का अर्थ है कल्याण और शुभता। हिंदू धर्म में इसे शुभारंभ, सूर्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। जैन और बौद्ध परंपराओं में भी इसका विशेष महत्व है। भारत में घरों, मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों में इसे मंगलचिन्ह के रूप में बनाया जाता है।
हिटलर ने क्यों चुना यही चिन्ह?
19वीं सदी में यूरोप में ‘आर्य नस्ल’ की एक थ्योरी लोकप्रिय हुई, जिसे बाद में गलत साबित किया गया। हिटलर ने इसी अवधारणा को अपनाकर स्वास्तिक को कथित आर्य पहचान से जोड़ा और इसे नाजी विचारधारा का प्रतीक बना दिया। इस तरह एक प्राचीन शुभ चिन्ह इतिहास की गलत व्याख्या के कारण नफरत से जुड़ गया।
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