विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह रहे मुख्य अतिथि

अलीगढ़ में स्थित मंगलायतन विश्वविद्यालय के 12वें दीक्षांत समारोह का आयोजन अत्यंत उत्साह, गरिमा और शैक्षणिक उत्कृष्टता के वातावरण में किया गया। इस समारोह में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उपाधियां प्रदान की गईं और अनेक प्रतिभाशाली छात्रों को पदक व सम्मान से नवाजा गया।

दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण अवसर रहा, जिसमें हजारों विद्यार्थियों ने अपनी शैक्षणिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव को पार करते हुए जीवन के नए अध्याय की शुरुआत की।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद राष्ट्रीय गीत और विश्वविद्यालय के कुल गीत की प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा परिसर शैक्षणिक और सांस्कृतिक उत्साह से भर उठा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के चेयरमैन हेमंत गोयल का सानिध्य प्राप्त हुआ। कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों और विकास कार्यों का विस्तृत विवरण दिया।
समारोह के दौरान उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शपथ भी दिलाई गई और उन्हें समाज व राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
“ज्ञान, परिश्रम और मूल्यों से करें राष्ट्र निर्माण” — सतीश महाना

मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं बल्कि वर्षों की मेहनत, समर्पण और संघर्ष का उत्सव होता है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन का यह क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी समय वे अपनी शैक्षणिक यात्रा को पूर्ण कर जीवन के नए अध्याय में प्रवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की नहीं बल्कि उनके माता-पिता, शिक्षकों और पूरे विश्वविद्यालय परिवार की भी है, जिनके मार्गदर्शन और विश्वास से छात्र इस मुकाम तक पहुंचते हैं।
उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि व्यक्ति के बौद्धिक, नैतिक और सामाजिक विकास का आधार है।
सतीश महाना ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। तकनीक, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा ने नई चुनौतियां और अवसर पैदा किए हैं। ऐसे समय में भारत जैसे युवा राष्ट्र के लिए शिक्षित और कुशल युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने बताया कि देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी युवा है, जो भारत की सबसे बड़ी ताकत है। युवाओं को सशक्त बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार कौशल विकास, स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया और नई शिक्षा नीति जैसी अनेक पहलें चला रही हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में ज्ञान के साथ विनम्रता और नैतिकता भी उतनी ही आवश्यक है। शिक्षा व्यक्ति को विनम्र बनाती है और यही विनम्रता उसे वास्तविक सफलता की ओर ले जाती है। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
“विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की होगी अहम भूमिका” — स्वतंत्र देव सिंह

विशिष्ट अतिथि जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि दीक्षांत समारोह किसी भी विश्वविद्यालय के जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण अवसर होता है।
उन्होंने कहा कि यह वह क्षण है जब वर्षों की मेहनत और अध्ययन एक नई ऊर्जा के रूप में समाज के सामने आता है। विद्यार्थी इस अवसर पर केवल डिग्री प्राप्त नहीं करते बल्कि जीवन की नई जिम्मेदारियों की ओर बढ़ते हैं।
स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और डेटा विज्ञान ने दुनिया के कार्य करने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। इसलिए आज सफलता केवल डिग्री से नहीं बल्कि कौशल, रचनात्मकता और निरंतर सीखने की क्षमता से तय होती है।
उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
मंत्री ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि आज का युवा केवल नौकरी खोजने वाला नहीं बल्कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से नए अवसर पैदा करने वाला बन सकता है। उन्होंने छात्रों से असफलताओं से सीखते हुए निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
शिक्षा समाज की प्रगति का आधार — ऋषिपाल सिंह
विधान परिषद सदस्य ऋषिपाल सिंह ने कहा कि शिक्षा ही वह आधार है जो व्यक्ति को सफलता और समाज को प्रगति की दिशा देता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने युवाओं से जीवन में ईमानदारी, परिश्रम और नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
समाज के लिए प्रेरणा बनें विद्यार्थी — कुलाधिपति
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति डॉ. अच्युतानंद मिश्र ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के सपनों और संघर्ष की यात्रा का उत्सव है।
उन्होंने कहा कि आज मिलने वाली उपाधि केवल प्रमाणपत्र नहीं बल्कि आपके ज्ञान, अनुशासन और मेहनत का प्रतीक है। भारतीय परंपरा के प्रसिद्ध वाक्य “सा विद्या या विमुक्तये” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति को समाज और मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करे।
उन्होंने विद्यार्थियों से विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर कुलपति ने डाला प्रकाश
कुलपति प्रो. पीके दशोरा ने कहा कि दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय का सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन होता है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, संगोष्ठियां, सांस्कृतिक, तकनीकी और खेलकूद कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।
एनएसएस, उन्नत भारत अभियान और विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्लेसमेंट के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
हजारों विद्यार्थियों को मिली उपाधियां
दीक्षांत समारोह में इस वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उपाधियां प्रदान की गईं।
- 3555 विद्यार्थियों को स्नातक उपाधि
- 1780 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर उपाधि
- 99 शोधार्थियों को पीएचडी
- 27 विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा
- 575 विद्यार्थियों को डिप्लोमा
इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 9 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 9 को रजत पदक तथा 13 विद्यार्थियों को विशेष प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
अतिथियों को प्रदान की गई मानद उपाधि
समारोह के दौरान मंगलायतन विश्वविद्यालय द्वारा विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को मानद उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उन्हें समाज, प्रशासन और जनसेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया। मानद उपाधि किसी भी विश्वविद्यालय द्वारा विशिष्ट व्यक्तित्वों को उनके असाधारण योगदान और समाज के प्रति समर्पण के लिए प्रदान किया जाने वाला प्रतिष्ठित शैक्षणिक सम्मान होता है।
इन विद्यार्थियों को मिले स्वर्ण और रजत पदक
स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी:
यश प्रताप सिंह, सोनाली, दीपांशु, नंदिनी अग्रवाल, सौरभ, अवधेश पासवान, जहान्वी शर्मा, खुशी गुप्ता।
रजत पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी:
अंशिका गोयल, साधना शर्मा, मोनिका लवानिया, विधु शुक्ला, उत्कर्ष जैन, भारत शर्मा, पुलकित शर्मा, गरिमा वार्ष्णेय, गुंजन।
गोल्ड मेडलिस्ट विद्यार्थियों ने साझा किए अनुभव
गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाली छात्रा सोनाली ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में स्वर्ण पदक प्राप्त करना अत्यंत गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे शिक्षकों का मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और उनकी निरंतर मेहनत रही है।
छात्र प्रेरित टंडन ने कहा कि गोल्ड मेडल प्राप्त कर उन्हें अत्यंत खुशी हो रही है। उनका मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।
नंदिनी अग्रवाल ने कहा कि अनुशासन और कड़ी मेहनत के बिना सफलता संभव नहीं है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया।
सौरभ ने कहा कि यह स्वर्ण पदक उनके लिए केवल सम्मान नहीं बल्कि भविष्य में और बेहतर करने की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में बिताया गया समय हमेशा यादगार रहेगा।
जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी रहे उपस्थित
समारोह में कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। इनमें इगलास विधायक राजकुमार सहयोगी, खैर विधायक सुरेंद्र दिलेर, छर्रा विधायक रवेंद्रपाल सिंह, कोल विधायक अनिल पाराशर, जिलाधिकारी संजीव रंजन, एसएसपी नीरज जादौन, भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह और रालोद जिलाध्यक्ष कालीचरन सिंह शामिल रहे।
इसके अलावा एएमयू के प्रति कुलपति प्रो. मोहम्मद गुलरेज सहित विश्वविद्यालय के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपिका बांदिल ने किया और राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
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