हिन्दुस्तान मिरर | 10 जून 2025
लखनऊ/दिल्ली – उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अचानक दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मीटिंग को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें यूपी बीजेपी संगठन में बड़े बदलाव की चर्चा हुई।
बैठक के बाद साफ हो गया है कि बहुत जल्द उत्तर प्रदेश बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने वाला है। साथ ही सरकार और संगठन के कई चेहरों में फेरबदल की तैयारी भी है।
क्या हुआ बैठक में?
योगी और शाह के बीच करीब 35 मिनट तक बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि पुलिस भर्ती प्रक्रिया, नियुक्ति पत्र वितरण और पार्टी संगठन में बदलाव जैसे मुद्दों पर बात हुई।
बैठक के बाद सीएम योगी लखनऊ लौट आए हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में अब नए अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं।
किसका नाम सबसे आगे?
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चाओं का दौर तेज़ हो गया है। संगठन के शीर्ष पद के लिए कई नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जिसमें पार्टी की सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति साफ़ झलक रही है।
ओबीसी और दलित वर्ग से नामों पर ज़ोर
ओबीसी वर्ग से राज्य के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा के नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आए हैं। दोनों ही नेताओं का समाज में मजबूत जनाधार है और पार्टी के अंदरूनी समीकरणों में इनकी भूमिका अहम मानी जाती है।
वहीं दलित वर्ग से विधायक विद्यासागर सोनकर और सांसद विनोद सोनकर के नाम चर्चा में हैं। इनके अतिरिक्त समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, जो सपा के खिलाफ आक्रामक रुख, साफ़ छवि और युवाओं में लोकप्रियता के चलते भाजपा के लिए एक सशक्त जवाब माने जा रहे हैं, का नाम भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। असीम अरुण की प्रशासनिक पृष्ठभूमि और तेज़ निर्णय क्षमता उन्हें अन्य दावेदारों से अलग बनाती है।
ब्राह्मण समुदाय से भी दो नाम आगे
ब्राह्मण समाज को साधने की दिशा में पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा और पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी के नामों पर विचार हो रहा है। दोनों ही नेता संगठनात्मक अनुभव और साफ-सुथरी छवि के लिए जाने जाते हैं।
प्रदेश में अब तक 28 जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा नहीं हो सकी है, जिससे ज़मीनी स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्रीय अध्यक्षों की अपनी-अपनी टीमें भी अधूरी हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में असमंजस और ऊर्जा की कमी देखी जा रही है।
क्या है भविष्य की राह?
पार्टी सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व द्वारा व्यापक मंथन के बाद जल्द ही नए प्रदेश अध्यक्ष का एलान किया जा सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा किस सामाजिक समीकरण को वरीयता देती है और कौन होगा उत्तर प्रदेश में पार्टी का नया चेहरा।
संगठन में भी बदलेगा समीकरण
नए अध्यक्ष के साथ ही संगठन की पूरी टीम में नई ऊर्जा लाई जाएगी। महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, दलित और पिछड़ा वर्ग के नेताओं को अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। पार्टी चाहती है कि बूथ स्तर तक मजबूत तैयारी हो ताकि पंचायत चुनाव 2026 और विधानसभा चुनाव 2027 में शानदार प्रदर्शन हो।
क्यों ज़रूरी है ये बदलाव?
बीजेपी को अब 2027 की बड़ी जंग की तैयारी करनी है। ऐसे में एक नया, जोशीला और सामाजिक रूप से संतुलित चेहरा संगठन की कमान संभाले, यही पार्टी की प्राथमिकता है।
योगी और शाह की मुलाकात से यह तय हो गया है कि बीजेपी यूपी में अब नई रणनीति के साथ मैदान में उतरने वाली है। बस अब इंतज़ार है उस नए नाम का, जो प्रदेश संगठन की बागडोर संभालेगा और पार्टी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
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