हिन्दुस्तान मिरर | 3 जुलाई 2025
उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य करने के सरकार के आदेश का अब व्यापक विरोध शुरू हो गया है। बुधवार को इस निर्णय के खिलाफ प्रदेशभर के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों में नाराजगी देखने को मिली। इसी कड़ी में माध्यमिक शिक्षा परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा निदेशक (पदेन अध्यक्ष) को संबोधित ज्ञापन जिला विद्यालय निरीक्षक के प्रतिनिधि डॉ. रवेंद्र पाल सिंह तोमर को सौंपा।
ज्ञापन सौंपते हुए परिषद के अध्यक्ष डालेश काकरान, जिला मंत्री केके शर्मा और कोषाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र पाल सिंह ने ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को पूरी तरह अव्यवहारिक और शिक्षा विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि मोबाइल ऐप के माध्यम से हाजिरी लगवाने की प्रक्रिया से विद्यालयों का पठन-पाठन और प्रशासनिक कार्य बाधित होंगे। शिक्षकों का ध्यान पढ़ाई से हटकर तकनीकी प्रक्रिया में उलझ जाएगा।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के करीब 80 प्रतिशत विद्यालयों में अभी भी लैपटॉप, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। एक साल पूर्व सरकार द्वारा दिए गए टैबलेट और लैपटॉप भी प्रभावी रूप से उपयोग में नहीं आ सके और प्रयोग असफल साबित हुआ। अब पुनः डिजिटल हाजिरी का आदेश थोपकर सरकार शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर अविश्वास जता रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
पूर्व विधान परिषद सदस्य जगवीर किशोर जैन ने भी इस आदेश को अव्यवहारिक बताते हुए सरकार से इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विद्यालयों में प्रार्थना सभा, आगंतुकों से संवाद, मध्याह्न भोजन योजना, आकस्मिक कक्षाओं की व्यवस्था जैसी जिम्मेदारियां निभाते हुए शिक्षकों के लिए मोबाइल ऐप से उपस्थिति अपलोड करना व्यावहारिक नहीं है।
प्रधानाचार्य परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश को जल्द वापस नहीं लिया गया, तो शिक्षक और प्रधानाचार्य विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। प्रतिनिधिमंडल द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की गई है।