उर्वरकों की गुणवत्ता, उपलब्धता और मूल्य नियंत्रण पर डीएम सख्त, जमाखोरी व ओवररेटिंग पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश
हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:17 जुलाई 2025 अलीगढ़,
किसानों को गुणवत्तापूर्ण रासायनिक उर्वरक समय से उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी संजीव रंजन की अध्यक्षता में कलैक्ट्रेट सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सहकारिता, कृषि विभाग, थोक विक्रेताओं व कंपनियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही।

समिति स्तर पर उर्वरकों की अनिवार्य उपलब्धता के निर्देश
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी समितियों पर प्रिपोजिशनिंग स्टॉक के माध्यम से यूरिया और डीएपी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं। सहायक निबंधक सहकारिता नागेंद्र पाल सिंह को चेतावनी दी गई कि किसी भी समिति पर उर्वरकों की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं, और किसी भी स्तर पर लापरवाही पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
उर्वरकों की बिक्री दर होगी निर्धारित सीमा में
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि यूरिया की बिक्री केवल ₹266 प्रति बैग तथा डीएपी की बिक्री ₹1350 प्रति बैग की दर से ही की जाएगी। इससे अधिक मूल्य पर बिक्री करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उर्वरक निरीक्षकों को दी गई विशेष जिम्मेदारी
डीएम ने उर्वरक निरीक्षकों को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से निरीक्षण करें और फर्जी बिक्री, जमाखोरी व ओवररेटिंग की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करें। सभी बिक्री केंद्रों पर मूल्य सूची का प्रदर्शन अनिवार्य करने के भी निर्देश दिए गए।
डिजिटल वितरण व्यवस्था को मिलेगी प्राथमिकता
उप निदेशक कृषि अरुण कुमार चौधरी ने निर्देश दिए कि उर्वरक वितरण पीओएस मशीन और आधार सत्यापन के जरिए ही हो। साथ ही, रैक प्लान के अनुसार समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उर्वरक के साथ किसी अन्य उर्वरक का टैग नहीं लगाया जाए और प्रतिदिन स्टॉक बोर्ड व रेट बोर्ड का अंकन अनिवार्य है। प्रत्येक विक्रेता को पीओएस पर्ची देना होगा और यदि कोई कृषक अधिक मात्रा में उर्वरक खरीदता है तो उससे खतौनी लेकर रजिस्टर में उसका विवरण अंकित किया जाए।
जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता
जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि वर्तमान में जिले में कुल 25,759 मीट्रिक टन यूरिया, 2,588 मीट्रिक टन डीएपी और 5,445 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। इनमें से सहकारिता क्षेत्र को 5,151 मीट्रिक टन यूरिया, 495 मीट्रिक टन डीएपी और 2,243 मीट्रिक टन एनपीके आवंटित किया गया है। शेष उर्वरक निजी क्षेत्र में वितरित किया गया है। हालांकि, थोक विक्रेताओं ने बताया कि यूरिया की अपेक्षा डीएपी की मांग कम है।
बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह, सहायक निबंधक सहकारिता नागेंद्र पाल सिंह, कृषि विभाग के अन्य अधिकारी, थोक विक्रेता एवं उर्वरक कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने सभी से अपील की कि किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए और उर्वरकों की आपूर्ति एवं मूल्य नियंत्रण में कोई लापरवाही न हो।