हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अलीगढ़, 14 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विभागों एवं अन्य संस्थाओं में ‘एंटी-रैगिंग डे’ के अवसर पर विविध जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों में आपसी सम्मान, सुरक्षा और समावेशी परिसर वातावरण को बढ़ावा देना था।

कंप्यूटर साइंस विभाग में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, शोध छात्रों और एमसीए, एम.एससी. (साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक्स) तथा बी.एससी. (कंप्यूटर साइंस एंड एप्लिकेशन) के छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहम्मद नदीम ने किया। विभागाध्यक्ष प्रो. अरमान रसूल फरीदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि नवागंतुक छात्रों को समर्थन देना, रैगिंग मुक्त परिसर सुनिश्चित करना और यूजीसी की एंटी-रैगिंग नियमावली का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने मेंटरशिप, सतर्कता और जागरूकता को रैगिंग के विरुद्ध प्रभावी उपाय बताया तथा रैगिंग की घटनाओं की रिपोर्टिंग प्रक्रिया को समझाया। अंत में डॉ. नदीम ने एंटी-रैगिंग शपथ दिलाई।

इतिहास विभाग में अंडरग्रेजुएट हिस्ट्री क्लब और विभाग की एंटी-रैगिंग समिति ने मिलकर ‘स्टॉप बुलीइंग नाउ’ विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया। डॉ. अनीसा इकबाल ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए रैगिंग को अमानवीय प्रथा बताते हुए उसकी निंदा की और कहा कि यह राष्ट्रीय प्रगति में बाधा बनती है। विभागाध्यक्ष प्रो. हसन इमाम ने एएमयू की परंपराओं और रैगिंग के प्रति विश्वविद्यालय की शून्य सहनशीलता नीति की सराहना की और छात्रों से आपसी सहयोग बनाए रखने का आग्रह किया।
विशिष्ट वक्ताओं में प्रो. एस. चांदनीबी ने रैगिंग से होने वाले मानसिक और शारीरिक नुकसान पर चर्चा की, जबकि एस सबा ने सरकार की नीतियों, रोकथाम कार्यक्रमों और शिकायत निवारण तंत्र की जानकारी दी। समापन भाषण में प्रो. परवेज नजीर ने रैगिंग को एक पिछड़ी सोच का प्रतीक बताया और छात्रों से अकादमिक उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। धन्यवाद ज्ञापन अंडरग्रेजुएट हिस्ट्री क्लब के सचिव डैनिश असलम ने किया।
भाषाविज्ञान विभाग ने एंटी-रैगिंग सप्ताह के अंतर्गत स्लोगन लेखन प्रतियोगिता आयोजित की। इस प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में छात्र एवं शोध छात्र शामिल हुए और रैगिंग मुक्त परिसर के प्रति अपनी रचनात्मकता व प्रतिबद्धता दर्शाई। विभागाध्यक्ष मसूद अली बेग ने छात्रों को रैगिंग के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए इससे दूर रहने की सलाह दी। सभी शिक्षकगण इस पहल के समर्थन में उपस्थित रहे।
एंटी-डिस्क्रिमिनेशन (भेदभाव विरोधी) विषय पर एक जानकारीवर्धक व्याख्यान भी आयोजित किया गया। विभागाध्यक्ष मसूद अली बेग ने एएमयू की समानता और समावेशन की दीर्घ परंपरा पर प्रकाश डाला। डॉ. नाजरीन बी लस्कर ने संविधान में निहित समानता के अधिकार की चर्चा की, वहीं डॉ. पल्लव विष्णु ने संस्थानों की महानता में समानता की भूमिका को रेखांकित किया। डॉ. सबाहुद्दीन अहमद और डॉ. अब्दुल अजीज खान ने सर सैयद अहमद खान के समावेशी दृष्टिकोण पर विचार साझा किए। कार्यक्रम में दो नवागत छात्रों, मिस सिदरा और मोहम्मद आशीक पी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए स्वागतपूर्ण शैक्षणिक वातावरण की महत्ता को रेखांकित किया।
एएमयू गर्ल्स स्कूल में प्राचार्या आमना मलिक और उप-प्राचार्या अल्का अग्रवाल के मार्गदर्शन में एंटी-रैगिंग सप्ताह का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षकों और कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की।
इस अवसर पर कक्षा 10ई की छात्रा अरीबा असद द्वारा एक इंटरैक्टिव ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति दी गई, जिसमें रैगिंग के दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। उन्होंने रैगिंग के भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक प्रभावों के साथ-साथ इससे संबंधित कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी। इस अवसर पर एंटी-रैगिंग समिति का भी गठन किया गया।
प्रातःकालीन सभा के दौरान, कक्षा 12 (आर्ट्स) की छात्राओं मनप्रीत वैद और अरशी रफीक ने भाषण दिए, जिनमें रैगिंग से उत्पन्न मानसिक एवं भावनात्मक कष्टों को उजागर किया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रैगिंग केवल एक अनुचित प्रथा ही नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है।















