हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
संक्रमण का बढ़ता दायरा
केरल में दिमाग खाने वाले अमीबा नेगलेरिया फाउलेरी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। एक महीने में राज्य में 6 लोगों की मौत हो चुकी है और अब तक 52 लोग संक्रमित पाए गए हैं। यह बीमारी, जिसे अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस (PAM) कहा जाता है, बेहद दुर्लभ लेकिन घातक है। मृत्यु दर लगभग 98% है, यानी 100 मरीजों में से 98 की मौत हो सकती है।
कैसे फैलता है संक्रमण?
यह अमीबा गंदे, गर्म और ठहरे हुए पानी में पनपता है। खासतौर पर नदियों, तालाबों, बाढ़ के पानी और असुरक्षित जलाशयों में इसकी मौजूदगी ज्यादा पाई जाती है। नहाने या गोता लगाने पर यह नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है और सीधे दिमाग तक पहुंचकर मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलती।
बच्चों और युवाओं में खतरा ज्यादा
विशेषज्ञों के अनुसार 10 से 18 वर्ष की उम्र के बच्चे और युवा, जो नदियों-तालाबों में नहाना पसंद करते हैं, उनमें संक्रमण की आशंका सबसे ज्यादा होती है। इसीलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि बच्चों को ऐसे जलाशयों से दूर रखना चाहिए।
जांच और इलाज
आम जांच से इस बीमारी का पता नहीं चलता। पीसीआर टेस्ट के जरिए ही इसे सही से पहचाना जा सकता है। भारत में कई मरीजों का इलाज संभव हुआ है, लेकिन अब तक कोई पक्का इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है। विभिन्न एंटीबायोटिक का संयोजन करके उपचार किया जाता है, हालांकि सफल होने की संभावना बहुत कम है।
जलवायु परिवर्तन की भूमिका
डॉक्टरों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन भी इस संक्रमण को बढ़ावा दे रहा है। केरल में इस बार लंबे समय तक बारिश और गर्म तापमान ने अमीबा की सक्रियता बढ़ा दी है। गर्म पानी (लगभग 40 डिग्री) में यह अमीबा सबसे ज्यादा सक्रिय होता है और लंबे समय तक जीवित रहता है।
भारत और दुनिया में स्थिति
- 2019 तक भारत में 17 मामले दर्ज हुए थे, लेकिन कोरोना महामारी के बाद संक्रमणों में तेजी देखी गई।
- हरियाणा में 2019 में एक बच्ची में यह संक्रमण मिला था।
- 2016 से 2022 तक केरल में केवल 8 मामले आए, जबकि 2023 में ही 36 मामले सामने आए और 9 लोगों की मौत हुई।
- वैश्विक स्तर पर 1968 से 2019 तक अमेरिका में 143 मामले दर्ज हुए, जिनमें 139 मौतें हुईं। पाकिस्तान, भारत और थाईलैंड एशिया के सबसे प्रभावित देश हैं।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी दुर्लभ जरूर है लेकिन बेहद खतरनाक है। ऐसे में बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है।
- नदियों, तालाबों और गंदे पानी में नहाने से बचें।
- कुओं और सार्वजनिक जल स्रोतों की सफाई व क्लोरीनेशन करें।
- सिरदर्द, बुखार, उल्टी, गर्दन अकड़ने जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष
ब्रेन-ईटिंग अमीबा ने साबित कर दिया है कि यह केवल केरल या भारत की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चुनौती है। इसकी घातकता को देखते हुए सतर्कता और समय पर पहचान ही मरीज की जान बचाने का सबसे बड़ा साधन है।













