कोलकाता।हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
पश्चिम बंगाल की सियासत गुरुवार को उस समय और गरमा गई, जब केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया। मामला राजनीतिक कंसल्टेंट कंपनी I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) और उसके मुखिया प्रतीक जैन से जुड़ा है, जहां ईडी ने छापेमारी के दौरान अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत हटाए जाने का आरोप लगाया है।
I-PAC और प्रतीक जैन के ठिकानों पर रेड
ईडी ने कोलकाता के साल्ट लेक इलाके में स्थित I-PAC के दफ्तर और कंपनी के मालिक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई। ईडी हेडक्वार्टर यूनिट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 6 और दिल्ली में 4 सहित कुल 10 स्थानों पर तलाशी ली जा रही है।
हवाला और कोयला तस्करी से जुड़ा मामला
ईडी का दावा है कि यह छापेमारी हवाला कारोबार और कोयला तस्करी सिंडिकेट से जुड़े मनी ट्रेल की जांच के तहत की गई है। आरोप है कि अनूप माजी के नेतृत्व में चल रहे कोयला तस्करी नेटवर्क से अवैध धन आया, जिसे हवाला के जरिए घुमाया गया। यह कोयला पश्चिम बंगाल के ECL लीज क्षेत्रों से चोरी कर शाकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनीज को बेचा गया।
ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप
ईडी के अनुसार, छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ प्रतीक जैन के घर पहुंचीं। आरोप है कि इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज जबरन वहां से हटाए गए। बाद में मुख्यमंत्री का काफिला I-PAC दफ्तर भी पहुंचा, जहां भी इसी तरह की कार्रवाई का आरोप लगाया गया।
ED का स्पष्टीकरण
ईडी ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दल या चुनाव को ध्यान में रखकर नहीं की गई है। किसी पार्टी ऑफिस की तलाशी नहीं ली गई और यह नियमित मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। एजेंसी का दावा है कि तलाशी पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों के तहत की गई।
राजनीतिक हलचल तेज
विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के पश्चिम बंगाल दौरे के बीच इस कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल और गर्म कर दिया है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की भूमिका अहम मानी जा रही है।













