हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
फिटनेस टेस्ट बना टकराव की जड़
श्रीलंका के तेज गेंदबाज नुवान तुषारा ने श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला आईपीएल 2026 में खेलने की अनुमति यानी एनओसी (No Objection Certificate) से जुड़ा है। दरअसल, बोर्ड ने तुषारा को फिटनेस टेस्ट में फेल होने के आधार पर एनओसी देने से इनकार कर दिया। श्रीलंका क्रिकेट का नियम है कि विदेशी लीग में खेलने के लिए खिलाड़ियों का फिटनेस टेस्ट पास करना अनिवार्य है। इसी फैसले को चुनौती देते हुए तुषारा ने कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है।
आरसीबी से जुड़ा है मामला
तुषारा रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) टीम का हिस्सा हैं। उन्हें पिछले सीजन में 1.6 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। आईपीएल 2026 में आरसीबी अपना एक मैच खेल भी चुकी है, लेकिन तुषारा अभी तक श्रीलंका में ही रुके हुए हैं। उनकी अनुपस्थिति टीम के लिए भी नुकसानदायक मानी जा रही है।
कॉन्ट्रैक्ट खत्म, फिर भी रोक का आरोप
तुषारा का दावा है कि उनका केंद्रीय कॉन्ट्रैक्ट 31 मार्च को समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद बोर्ड उन्हें फिटनेस का हवाला देकर एनओसी नहीं दे रहा है। उन्होंने कोर्ट में यह भी कहा कि इस फैसले के कारण उन्हें लगभग 1.6 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है। यह मामला अब खिलाड़ी और बोर्ड के बीच अधिकारों की लड़ाई बन चुका है।
सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से भी दूरी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तुषारा अब श्रीलंका बोर्ड का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट भी स्वीकार नहीं करेंगे। इस फैसले से उनके अंतरराष्ट्रीय करियर पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अगर वह बोर्ड से दूरी बनाते हैं, तो भविष्य में श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी मुश्किल हो सकती है।
प्रदर्शन और खासियत
नुवान तुषारा एक प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज हैं। उन्होंने श्रीलंका के लिए 30 टी20 मैचों में 36 विकेट लिए हैं और उनका इकॉनमी रेट 8.1 रहा है। उनकी गेंदबाजी शैली काफी हद तक लसित मलिंगा से मिलती-जुलती है, जिससे बल्लेबाजों के लिए उन्हें खेलना आसान नहीं होता।
यह विवाद सिर्फ एक खिलाड़ी का मामला नहीं, बल्कि क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों के अधिकारों के बीच संतुलन का बड़ा मुद्दा बन सकता है। अब सबकी नजर कोर्ट के फैसले पर टिकी है।
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