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भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर, अभिषेक बनर्जी के ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ पर उठे सवाल
पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर गुरुवार को पुनर्मतदान हो रहा है। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) उम्मीदवार जहांगीर खान के चुनावी मैदान से हटने के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल गया है। कभी टीएमसी का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली यह सीट अब भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर का केंद्र बन गई है।
फलता विधानसभा सीट दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित है और पिछले करीब 15 वर्षों से यह टीएमसी के प्रभाव वाली सीट रही है। हालांकि, हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने यहां के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को मतदान के दौरान कथित धांधली के आरोपों के बाद चुनाव रद्द कर पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया था। गुरुवार को सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक मतदान होगा, जबकि मतगणना 24 मई को की जाएगी।
जहांगीर के हटने से बदली चुनावी तस्वीर
टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने दो दिन पहले चुनाव से हटने का ऐलान कर सबको चौंका दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा फलता क्षेत्र के लिए घोषित विशेष पैकेज से विकास की नई संभावनाएं खुलेंगी और इसी आधार पर उन्होंने चुनावी मैदान छोड़ने का फैसला लिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहांगीर के हटने से भाजपा को बड़ा फायदा मिल सकता है। भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा को अब मजबूत स्थिति में माना जा रहा है। कांग्रेस ने अब्दुर रज्जाक मोल्ला को मैदान में उतारा है, जबकि माकपा के शंभुनाथ कुर्मी और कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी को बड़ा झटका
फलता सीट का घटनाक्रम टीएमसी सांसद और पार्टी के प्रमुख नेता अभिषेक बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। उनके चर्चित ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ की मजबूती पर अब सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भाजपा यहां जीत दर्ज करती है तो यह राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
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