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पहलगाम हमले की NIA चार्जशीट: ‘लंगड़ा’ मास्टरमाइंड का खुलासा, आतंकियों को मिली स्थानीय सहायता

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़

जांच में सामने आए नए तथ्य

पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी की चार्जशीट के अनुसार इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता लश्कर-ए-तैयबा और उसके प्रॉक्सी संगठन The Resistance Front (TRF) से जुड़ा आतंकी सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ है। NIA ने उसे आरोपी नंबर-1 बनाया है। जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों को स्थानीय स्तर पर सहायता मिली, जिसके कारण हमला अंजाम तक पहुंच सका।

हमले से पहले आतंकियों ने ली थी पनाह

जांच एजेंसी के मुताबिक, हमले से एक दिन पहले तीन आतंकी—फैजल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ छोटू और हमजा अफगानी पहलगाम क्षेत्र में मौजूद थे। पूछताछ में सामने आया कि उन्होंने स्थानीय लोगों परवेज और बशीर अहमद से संपर्क किया था।

बशीर अहमद ने पूछताछ के दौरान बताया कि 21 अप्रैल को तीन हथियारबंद लोग उससे मिले और सुरक्षित जगह तक पहुंचाने की बात कही। इसके बाद उन्हें एक झोपड़ी तक पहुंचाया गया, जहां करीब पांच घंटे तक उन्हें ठहराया गया। इस दौरान उन्हें पानी, चाय और भोजन दिया गया। जांच के अनुसार आतंकियों ने बदले में तीन हजार रुपये भी दिए थे।

सुरक्षा से जुड़ी जानकारी जुटा रहे थे आतंकी

NIA के मुताबिक झोपड़ी में रुकने के दौरान आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा, सुरक्षा बलों की तैनाती, कैंपों की स्थिति और फोर्स की आवाजाही से जुड़ी सूचनाएं जुटाईं। रात में जाते समय वे अपने साथ खाने-पीने का सामान और कुछ घरेलू वस्तुएं भी ले गए।

जांच में यह भी सामने आया कि हमले वाले दिन परवेज और बशीर ने दोबारा उन्हीं आतंकियों को देखा था, लेकिन उन्होंने पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को इसकी सूचना नहीं दी। कुछ समय बाद बैसरन घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला कर दिया, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई।

पाकिस्तान से हो रहा था संचालन

NIA के अनुसार पाकिस्तान के लाहौर में बैठा साजिद जट्ट ही इस पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित कर रहा था। वह आतंकियों के संपर्क में था और उन्हें लगातार निर्देश तथा लोकेशन भेज रहा था।

जांच में सामने आया कि साजिद वर्ष 2005 में घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर पहुंचा था। उसने दक्षिण कश्मीर में स्थानीय युवाओं को प्रभावित कर एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया। बाद में वह पाकिस्तान लौट गया, लेकिन उसका नेटवर्क सक्रिय बना रहा।

‘लंगड़ा’ नाम की वजह और बड़ा नेटवर्क

जांच एजेंसी के अनुसार साजिद जट्ट को गोली लगने के बाद उसकी एक टांग काटनी पड़ी थी और वह कृत्रिम पैर का उपयोग करता है। इसी कारण उसे ‘लंगड़ा’ कहा जाता है। बताया गया है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद उसने TRF को मजबूत करने और ड्रोन के जरिए हथियार व नशीले पदार्थ भेजने में भूमिका निभाई।

फर्जी नैरेटिव फैलाने की कोशिश

NIA ने यह भी दावा किया है कि हमले के बाद सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। TRF से जुड़े टेलीग्राम चैनलों के जरिए पहले हमले की जिम्मेदारी ली गई और बाद में चैनल हैक होने की बात कही गई। तकनीकी जांच में इन चैनलों के पाकिस्तान से संचालित होने के संकेत मिले हैं।

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