हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
PM मोदी के दौरे के बीच शिक्षा, कारोबार, राजनीति और संस्कृति में भारतीय समुदाय की सफलता की कहानी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला न्यूजीलैंड दौरा है। करीब 53-54 लाख की आबादी वाले इस देश में भारतीय मूल के लोग केवल 5-6 प्रतिशत हैं, लेकिन उनका प्रभाव राजनीति, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति तक स्पष्ट दिखाई देता है।
भारतीय समुदाय ने अपनी पहचान मुख्य रूप से शिक्षा, मेहनत और उद्यमिता के दम पर बनाई है। बड़ी संख्या में भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्त जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं। कई छात्र पढ़ाई के लिए न्यूजीलैंड पहुंचे और वहीं पेशेवर जीवन शुरू कर देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे।
स्वास्थ्य से संसद तक मजबूत मौजूदगी
न्यूजीलैंड की स्वास्थ्य सेवाओं में भारतीय डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों का अहम योगदान है। दूरदराज के इलाकों में भी भारतीय विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं। वहीं छोटे कारोबार से लेकर आईटी, रियल एस्टेट, परिवहन और रेस्टोरेंट उद्योग तक भारतीय उद्यमियों ने मजबूत पहचान बनाई है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी बढ़ावा मिला है।
राजनीति में भी भारतीय मूल के नेताओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। सांसद प्रियंका राधाकृष्णन और डॉ. परमजीत कौर जैसे प्रतिनिधियों ने प्रवासी भारतीय समुदाय की आवाज को मजबूती दी है। वहीं क्रिकेट में रचिन रवींद्र, ईश सोढ़ी और आदित्य अशोक जैसे खिलाड़ियों ने भारतीय मूल की नई पीढ़ी को वैश्विक पहचान दिलाई है।
संस्कृति बनी सामाजिक एकता का माध्यम
दिवाली, होली, बैसाखी और गरबा जैसे भारतीय सांस्कृतिक आयोजन अब न्यूजीलैंड के प्रमुख शहरों में बड़े स्तर पर मनाए जाते हैं। इन आयोजनों में विभिन्न समुदायों की भागीदारी सामाजिक समरसता को मजबूत करती है। भारतीय समुदाय का पारिवारिक सहयोग, सामुदायिक संस्थाओं की सक्रियता और शिक्षा पर विशेष जोर उसकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
कुल मिलाकर, आबादी में हिस्सेदारी कम होने के बावजूद भारतीय समुदाय ने अपने योगदान, अनुशासन और सामाजिक भागीदारी के बल पर न्यूजीलैंड के विकास में महत्वपूर्ण स्थान बनाया है।













