हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से रासुवा में भारी तबाही, 384 यात्री लापता; 105 भारतीयों की पहचान, EU ने शुरू की सैटेलाइट निगरानी
नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई अचानक और विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। रासुवा जिले में तिमुरे और स्याफ्रुबेसी समेत कई इलाकों में बाढ़ का असर देखा गया। कई पुल बह गए और बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। सैकड़ों लोगों के लापता होने और कई लोगों की मौत की खबर के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी भयावह बाढ़ की वजह क्या रही?
शुरुआती जांच में हिमस्खलन को सबसे प्रमुख संभावित कारण माना जा रहा है। काठमांडू विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर के मुताबिक, आशंका है कि हिमस्खलन ल्हेन्डे नदी में गिरकर पानी के बहाव को रोक सकता है। इसके बाद जमा पानी अचानक नीचे की ओर बहा और भोटेकोशी नदी में पहुंचकर तबाही का कारण बना। हालांकि, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बाढ़ के संभावित कारणों में भूकंप की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार तिब्बती क्षेत्र में सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसका केंद्र गोसाईंकुंडा से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में बताया गया। भूकंप और बाढ़ का समय करीब होने के कारण इसकी संभावित भूमिका पर सवाल उठे हैं, लेकिन इसे बाढ़ का कारण साबित करने वाला कोई ठोस सबूत फिलहाल सामने नहीं आया है।
वहीं, भारी बारिश की संभावना को मौसम विभाग ने खारिज किया है। नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मंगलवार और बुधवार को रासुवा क्षेत्र में भारी बारिश नहीं हुई थी।
इस बीच नेपाल पर्यटन बोर्ड के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक 384 यात्री लापता बताए गए हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक हैं। इनमें 105 भारतीय और 37 एनआरआई की पहचान हुई है। आंकड़ों की पुष्टि का काम अभी जारी है।
बाढ़ के बाद यूरोपीय संघ ने Copernicus सैटेलाइट सिस्टम सक्रिय कर दिया है। इससे प्रभावित इलाकों की मैपिंग, नुकसान के आकलन और राहत-बचाव अभियानों में मदद मिलने की उम्मीद है। फिलहाल वैज्ञानिक और प्रशासनिक एजेंसियां बाढ़ के वास्तविक कारण का पता लगाने में जुटी हैं।
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