हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
कैंसर की दवाओं पर 30% मार्जिन कैप लगाएगी सरकार, सुप्रीम कोर्ट में प्रस्ताव
दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण का दायरा बढ़ाने की पैरवी, 27 अक्टूबर को अगली सुनवाई; कोर्ट ने पूरे फार्मा बाजार की कीमतों की समीक्षा पर दिया जोर
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार 30 प्रतिशत ट्रेड मार्जिन कैप लागू करने की तैयारी में है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस व्यवस्था के तहत चुनिंदा कैंसर रोधी दवाओं की सूची जारी की जाएगी। इसका उद्देश्य दवाओं की बिक्री में अत्यधिक मुनाफे पर अंकुश लगाना और कारोबारियों के लिए उचित मार्जिन सुनिश्चित करना है। बाजार की परिस्थितियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य की जरूरतों को देखते हुए सूची में समय-समय पर बदलाव भी किया जाएगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि इस व्यवस्था में नई दवाओं को भी शामिल किया जा सकेगा, जबकि सस्ती दवाओं को प्रस्तावित सीमा से बाहर रखने पर विचार किया जाएगा। सरकार का तर्क है कि दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करते समय उनकी उपलब्धता और बाजार में आपूर्ति का भी ध्यान रखना जरूरी है।
पूरे दवा बाजार की कीमतों पर नजर चाहता है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण का मुद्दा केवल कैंसर की दवाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। अदालत ने नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं की शुरुआती कीमतों को नियंत्रित करने और मेडिकल डिवाइस की कीमतों पर सीमा तय करने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए पूरे फार्मास्युटिकल बाजार की समीक्षा की जरूरत बताई। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।
पिछली सुनवाई में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने नॉन-शेड्यूल्ड और अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं पर भी एक समान रिटेल मार्जिन लागू करने का सुझाव दिया था। अदालत ने कुछ दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) और उनकी वास्तविक लागत के बीच बड़े अंतर पर सवाल उठाते हुए सरकार से मूल्य निर्धारण के आधार स्पष्ट करने को कहा।
कीमतों में कमी से मरीजों को राहत की उम्मीद
प्रस्तावित व्यवस्था से दवाओं की एमआरपी में 20 से 70 प्रतिशत तक कमी आने और सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान जताया गया है। हालांकि, ये संभावित लाभ हैं और वास्तविक परिणाम नियमों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि दवाओं की कीमतों और उनकी उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सरकार के मुताबिक, अत्यधिक मूल्य नियंत्रण से दवा कंपनियों और वितरकों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिससे बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट का जोर इस बात पर है कि मरीजों को जरूरी दवाएं उचित कीमत पर मिलें और मूल्य निर्धारण की व्यवस्था उपभोक्ताओं के हित में हो।
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