हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अलीगढ़/लखनऊ। आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अलीगढ़ में स्थित एक आयुर्वेदिक फार्मेसी में संयुक्त निरीक्षण टीम की छापेमारी ने नकली और खतरनाक दवाओं के निर्माण का ऐसा काला सच उजागर किया जिसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया।
छापेमारी में कंपनी के एक उत्पाद में सेडनाफ़िल साल्ट की मौजूदगी पाई गई। यह वही खतरनाक रासायनिक तत्व है जिसका प्रयोग उत्तेजक दवाओं में किया जाता है। इसके बावजूद भी जिम्मेदार अफसरों ने कोई करवाई नहीं की। नतीजतन जनता की ज़िंदगी को सीधा खतरे में डाल दिया जा रहा है।
यह पहला मौका नहीं है जब इस फैक्ट्री का काला सच सामने आया हो। सन 2016 में मुरादाबाद आयुर्वेदिक ड्रग ऑफिसर ने भी एक विस्तृत जांच कर फैक्ट्री को तुरंत बंद करने की प्रबल सिफारिश की थी। लेकिन वह रिपोर्ट दबा दी गई और फैक्ट्री ने अपने खतरनाक उत्पादन को जारी रखा। आज इसका नतीजा यह है कि हज़ारों लोगों की ज़िंदगी पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
इस फैक्ट्री पर पहले भी भारत की नामी-गिरामी कंपनियों के उत्पादों की नकली पैकेजिंग और डुप्लीकेसी के मामले में मुकदमा दर्ज हो चुका है। दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान फैक्ट्री के ने शपथ पत्र देकर माफी मांगी थी, लेकिन इसके बावजूद फैक्ट्री ने अपने अवैध कार्यों को जारी रखा।
संयुक्त निरीक्षण टीम ने साफ कहा कि यह फैक्ट्री जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है और इसके खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। टीम ने मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द करने, सभी उत्पादन गतिविधियां बंद करने और संचालकों पर कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है।
जांच टीम में अधिकारी डॉ. रेखा जे., ड्रग्स इंस्पेक्टर, आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली, पी. सेलवराज, ड्रग्स इंस्पेक्टर, सीडीएससीओ नॉर्थ ज़ोन, गाज़ियाबाद और डॉ. नरेंद्र कुमार, जिला आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी, अलीगढ़ शामिल रहे थे













