हिन्दुस्तान मिरर न्यूज: 3 अगस्त 2025
एएमयू वैज्ञानिक डॉ. हिफजुर सिद्दीकी को मिला वैश्विक पहचान, एनयूटी कार्सिनोमा पर अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देश निर्माण में अहम भूमिका
अलीगढ़, 3 अगस्त:
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जंतु विज्ञान विभाग के कैंसर शोधकर्ता डॉ. हिफजुर आर. सिद्दीकी को दुर्लभ और आक्रामक कैंसर एनयूटी कार्सिनोमा के निदान और उपचार के लिए बने पहले वैश्विक दिशानिर्देशों के निर्माण में विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह दिशानिर्देश सेल प्रेस के सहयोगी प्रतिष्ठित जर्नल दी इनोवेशन में प्रकाशित हुए हैं, जिसका 5-वर्षीय प्रभावांक 40 और वर्ष 2024 का प्रभावांक 25.7 है।

इस ऐतिहासिक योगदान के तहत डॉ. सिद्दीकी दुनिया भर के 175 वैज्ञानिकों में अकेले भारतीय शोधकर्ता हैं। इस वैश्विक टीम में अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, इटली, इजराइल, स्वीडन, ब्राजील, जापान सहित 16 देशों के विशेषज्ञ शामिल थे। इससे पहले वे टयूमर डिस्कवरी में प्रकाशित एनयूटी कार्सिनोमा पर आधारित पहले अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट कंसेंसस ग्रुप का भी हिस्सा रह चुके हैं।
डॉ. सिद्दीकी ने बताया कि एनयूटी कार्सिनोमा के बढ़ते मामलों के बावजूद अब तक इसके निदान व उपचार को लेकर कोई एकीकृत वैश्विक गाइडलाइन नहीं थी। इस शून्य को भरने हेतु 90 से अधिक संस्थानों—जिनमें विश्वविद्यालय, दवा कंपनियां और अस्पताल शामिल हैं—के शोधकर्ताओं ने मिलकर यह प्रमाण-आधारित दिशानिर्देश तैयार किए हैं, जो अब साइंसडायरेक्ट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।
गौरतलब है कि एनयूटी कार्सिनोमा की पहचान वर्ष 1991 में हुई थी। यह कैंसर एनयूटीएम1 जीन के पुनर्संयोजन से जुड़ा है और इसकी औसत जीवन प्रत्याशा केवल 6 से 9 महीने होती है। इसके रोगियों में 2 वर्षों तक जीवित रहने की संभावना मात्र 20-30% है।
डॉ. सिद्दीकी को हाल ही में एडिटर ऑफ डिस्टिंक्शन अवार्ड 2025 से भी सम्मानित किया गया है। उन्होंने अब तक 132 शोध पत्र प्रकाशित किए हैं जिनका कुल प्रभावांक 700 और औसत प्रभावांक 6.7 है।














