हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी की भूमिका पर की थी विवादित टिप्पणी, भाजपा
के भीतर भी उठी विरोध की आवाज
राज्य सरकार ने जारी किया नोटिस, कहा- राष्ट्रीय नायक का अपमान बर्दाश्त नहीं
पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाजपा के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज की ओर से नेताजी सुभाष चंद्र
बोस पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विवाद बढ़ने के बाद
राज्य सरकार ने अनंत महाराज को दिया गया ‘बंग विभूषण’ सम्मान वापस लेने का फैसला किया है।
सरकार ने इस संबंध में नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय नायकों के अपमान को किसी भी
स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अनंत महाराज ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान पर सवाल उठाते हुए कथित
तौर पर कहा था कि स्वतंत्रता आंदोलन में नेताजी की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने आजाद हिंद फौज
के इस्तेमाल को लेकर भी विवादित टिप्पणी की थी। उनके बयान सामने आने के बाद राजनीतिक दलों
और विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध शुरू हो गया। उनके खिलाफ अलग-अलग पुलिस थानों में
लिखित शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं।
सामाजिक योगदान के लिए मिला था सम्मान
राज्य सरकार की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि अनंत महाराज को उनके सामाजिक योगदान
को ध्यान में रखते हुए ‘बंग विभूषण’ सम्मान प्रदान किया गया था। हालांकि, नेताजी जैसे राष्ट्रीय नायक
को लेकर की गई टिप्पणी के बाद सरकार ने सम्मान वापस लेने का निर्णय लिया। सरकार ने यह भी
संकेत दिया कि राष्ट्रीय गौरव से जुड़े व्यक्तित्वों के अपमान पर आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा नेताओं ने भी जताई नाराजगी
मामले की खास बात यह रही कि अनंत महाराज की टिप्पणी के खिलाफ भाजपा के भीतर से भी
आवाजें उठीं। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने नेताजी को भारत माता का गौरव बताते हुए
कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानी पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेताजी ने
मातृभूमि की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित किया था।
तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष ने भी सरकार के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सम्मान
वापस लेने का कदम उचित है और अनंत महाराज के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के साथ उनकी
राज्यसभा सदस्यता पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
नेताजी के सम्मान पर सख्त रुख
विवाद के बीच राज्य सरकार ने साफ संदेश दिया है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान से किसी भी
प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। ‘बंग विभूषण’ वापस लेने के फैसले ने इस राजनीतिक विवाद
को और तेज कर दिया है।






















