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NEET पर बड़ा फैसला अभी बाकी, ऑनलाइन परीक्षा पर केंद्र ने SC में साफ किया रुख

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :

CBT या JEE की तर्ज पर दो चरणों में परीक्षा कराने पर अभी अंतिम निर्णय नहीं, नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद तय होगा परीक्षा का नया स्वरूप

नई दिल्ली। मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) को ऑनलाइन यानी कंप्यूटर आधारित कराने की चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार ने कहा है कि NEET को पेन-एंड-पेपर से कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) में बदलने अथवा जेईई की तर्ज पर एक या दो चरणों में कराने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। केंद्र अब नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

परीक्षा की सुरक्षा से लेकर छात्रों की सुविधा तक होगा आकलन

शिक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया कि टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था में सुधार के सभी पहलुओं का अध्ययन कर रही है। इसमें तकनीकी क्षमता, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा की निष्पक्षता, देशभर में उपलब्ध डिजिटल बुनियादी ढांचा और नई व्यवस्था का छात्रों पर पड़ने वाला प्रभाव शामिल है। रिपोर्ट के आधार पर ही परीक्षा के स्वरूप में बदलाव का फैसला लिया जाएगा।

22 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी, ग्रामीण छात्रों की भी चिंता

केंद्र ने कहा कि NEET-UG में हर वर्ष 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होते हैं। इनमें बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों की है। महिला अभ्यर्थियों की संख्या भी काफी अधिक है। ऐसे में सरकार किसी भी बदलाव से पहले सामाजिक समानता और सभी वर्गों की पहुंच को ध्यान में रखेगी।

CBT से पेपर लीक पर लग सकता है अंकुश

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कंप्यूटर आधारित परीक्षा से प्रश्नपत्र की सुरक्षा मजबूत हो सकती है और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ सकती है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा चुनौती बन सकती है। पर्याप्त डिजिटल प्रशिक्षण और मॉक टेस्ट के अभाव में उनके प्रदर्शन पर असर पड़ने की आशंका है।

देशभर में कंप्यूटर लैब तैयार करना बड़ी चुनौती

22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए पर्याप्त कंप्यूटर केंद्र, स्थिर इंटरनेट और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि CBT लागू करने से पहले बड़े स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट और मॉक टेस्ट जरूरी हैं। वहीं दो चरणों में परीक्षा कराने से बेहतर छात्रों की पहचान संभव हो सकती है, लेकिन इससे छात्रों पर तैयारी का दबाव और कोचिंग पर निर्भरता बढ़ने की आशंका भी है।

टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद होगा अंतिम फैसला

फिलहाल केंद्र सरकार NEET-UG में किसी बड़े बदलाव को लेकर जल्दबाजी के पक्ष में नहीं है। सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में परिवर्तन व्यापक अध्ययन और सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा। अब निगाहें हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद NEET के भविष्य के परीक्षा पैटर्न को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

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