हिन्दुस्तान मिरर न्यूज: शनिवार 28 जून 2025 नई दिल्ली
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। पार्टी नेतृत्व की योजना है कि आगामी संसद के मानसून सत्र (21 जुलाई से पहले) तक इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए। इसके लिए जरूरी प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक समेत करीब एक दर्जन राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव कराए जाएंगे। यह चुनाव राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के लिए आवश्यक निर्वाचक मंडल के गठन के लिए अनिवार्य हैं।
14 में ही हुए अब तक चुनाव, 5 और जरूरी
भाजपा के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से पहले कम से कम 19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रदेश अध्यक्ष का चयन होना चाहिए। अब तक 14 राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अभी कम से कम 5 राज्यों में यह बाकी है।
चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति
पार्टी ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए शुक्रवार को राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने तीन वरिष्ठ नेताओं को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया।
- हर्ष मल्होत्रा – उत्तराखंड
- किरेन रिजिजू – महाराष्ट्र
- रविशंकर प्रसाद – पश्चिम बंगाल
उत्तर प्रदेश सबसे बड़ी चुनौती
लोकसभा चुनावों में झटके के बाद उत्तर प्रदेश भाजपा नेतृत्व की बड़ी चिंता बना हुआ है। पार्टी का मानना है कि यहां ओबीसी वोट बैंक में आई कमजोरी और बसपा के कमजोर होने से उसका प्रभाव सपा-कांग्रेस की ओर जा रहा है। ऐसे में पार्टी यहां बड़े बदलाव और नए अध्यक्ष के साथ एक व्यापक रणनीति तैयार कर रही है।
कौन होगा नया अध्यक्ष?
नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर मंथन जारी है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व दलित समुदाय या दक्षिण भारत से जुड़े नेता को मौका देने के पक्ष में है।
इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:
- विपक्ष द्वारा भाजपा पर आरक्षण और संविधान को लेकर लगातार हमले।
- दक्षिण भारत में भाजपा के भविष्य के राजनीतिक विस्तार की योजना।
संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी
नए अध्यक्ष के चयन के बाद भाजपा संगठन को नया स्वरूप देने की दिशा में कदम बढ़ाएगी।
- राष्ट्रीय पदाधिकारी टीम में 60-70% नए चेहरे जोड़े जाएंगे।
- युवा, महिला और समाज के सभी वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा।
- संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति में भी बदलाव संभव हैं।
भाजपा के भीतर यह एक संक्रमण काल है, जिसमें पार्टी न केवल नेतृत्व परिवर्तन की ओर बढ़ रही है बल्कि संगठनात्मक संरचना को भी नए सिरे से गढ़ने की तैयारी में है। इन प्रयासों का उद्देश्य आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले संगठन को अधिक शक्तिशाली, युवा और समावेशी बनाना है।

















