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काशी में पहली बार 21 दिवसीय मंत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन: तीन हजार मंत्रों से रोगों का उपचार

हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ ✑ सोमवार 26 मई 2025

वाराणसी, 26 मई — काशी में पहली बार मंत्र चिकित्सा को लेकर एक ऐतिहासिक पहल की गई है। नव भारत निर्माण समिति और सनातनम द फायर के संयुक्त तत्वावधान में शुद्धिपुर स्थित ऋषिव वैदिक अनुसंधान, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में 21 दिवसीय मंत्र चिकित्सा शिविर की शुरुआत की गई है। इस शिविर का उद्देश्य विभिन्न रोगों से ग्रसित लोगों को वैदिक और प्राकृत मंत्रों के माध्यम से आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक राहत प्रदान करना है।

शिविर में कुल तीन हजार मंत्रों को रोगों के अनुसार वर्गीकृत किया गया है, जिनका उपयोग विशिष्ट चिकित्सा प्रक्रियाओं में किया जा रहा है। रोजाना तीन घंटे 14 मिनट के दो सत्रों में मंत्र विशेषज्ञ रोगियों को ध्यान, योग और प्राणायाम के साथ मंत्र चिकित्सा प्रदान कर रहे हैं।
सत्र को दो भागों में विभाजित किया गया है —

  • सुबह का सत्र: डेढ़ घंटे
  • शाम का सत्र: डेढ़ घंटे

शिविर के पहले ही दिन कुल 42 मरीजों ने पंजीकरण कराया और मंत्र चिकित्सा सत्रों में भाग लिया। इन मरीजों में ऑटिज्म, हाइपर एक्टिविटी, मानसिक तनाव, अनिद्रा, अवसाद और अन्य मानसिक/शारीरिक समस्याओं से ग्रसित रोगी शामिल थे।

ऑटिज्म से पीड़ित तीन बच्चों के लिए शुक्र ग्रह से संबंधित मंत्रों का जाप किया गया। वहीं राजगीर से आए मंत्र विशेषज्ञ अमृतेश कुमार भास्कर ने जैन मंत्रों के साथ बीज मंत्रों और आयुर्वेदिक मंत्रों का प्रयोग कर हाइपर एक्टिविटी पर नियंत्रण के लिए विशेष चिकित्सा की।

शिविर में मंत्र चिकित्सा की प्रक्रिया को बेहद वैज्ञानिक और चरणबद्ध ढंग से अपनाया गया है:

  1. सुबह 15 मिनट तक सामूहिक रूप से ‘ऊँ’ और वैदिक गायत्री मंत्र का जाप एवं ध्यान कराया जाता है।
  2. इसके बाद प्रत्येक रोगी को उसकी समस्या के अनुसार मंत्र सुनाए जाते हैं।
  3. रोगी को 30 मिनट तक ध्यान की अवस्था में मंत्रों को श्रवण करना होता है।
  4. फिर हर रोगी को 5 मिनट तक मंत्र का जाप कराया जाता है और अंत में ध्यान कराया जाता है।

शिविर में रोगियों की मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर व्यक्तिगत सेशन भी आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें मंत्र विशेषज्ञ सीधे रोगी से संवाद कर उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति के अनुसार मंत्रों का चयन करते हैं।

मंत्रों की भाषा और विशेषता

शिविर में प्रयुक्त सभी मंत्र प्राकृत भाषा में हैं, जिन्हें प्राचीन वैदिक ग्रंथों और परंपराओं से संकलित किया गया है। इन मंत्रों का उद्देश्य सिर्फ उपचार ही नहीं, बल्कि मानसिक और आत्मिक शुद्धि भी है।

मंत्र चिकित्सा का उद्देश्य सिर्फ शारीरिक उपचार नहीं, बल्कि मानसिक, आत्मिक और भावनात्मक शुद्धिकरण है। मंत्र विशेषज्ञों के अनुसार,

“मंत्रों के माध्यम से नकारात्मक सोच और भूतकाल में जीने वाले लोगों की सोच को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। यह चिकित्सा सिर्फ शरीर नहीं, मन को भी स्वस्थ बनाती है।”

शिविर के आयोजक और संस्थान के सचिव बृजेश सिंह ने बताया कि इस शिविर के माध्यम से मंत्रों की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक शक्ति को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में अधिक से अधिक लोग इसका लाभ लें, इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

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