NTA में 89% स्टाफ कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स पर, स्थायी कर्मी सिर्फ 11%
नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और स्टाफिंग व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। लोकसभा में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, NTA की कुल 221 सदस्यीय कार्यबल में 197 कर्मचारी यानी करीब 89 फीसदी कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स पर कार्यरत हैं, जबकि केवल 24 कर्मचारी (11 फीसदी) सरकारी डेपुटेशन पर हैं। नीट विवाद के बाद एजेंसी ने 47 अधिकारियों को सेवा से हटाने का फैसला लिया है। इनमें कुछ के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
39 स्वीकृत स्थायी पद, 15 अब भी खाली
NTA में कुल 39 स्थायी पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 24 पद भरे हुए हैं, जबकि 15 पद रिक्त हैं। एजेंसी की जरूरतों को पूरा करने के लिए 73 कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त किया गया है। इनमें जनरल मैनेजर (कम्युनिकेशन), सलाहकार, सीनियर कंसल्टेंट, सॉफ्टवेयर डेवलपर और यंग प्रोफेशनल जैसे पद शामिल हैं। इसके अलावा 124 कर्मचारी आउटसोर्सिंग के जरिए डेटा एनालिसिस, लीगल सपोर्ट, कंसल्टेंसी और हाउसकीपिंग जैसे कार्यों में लगे हैं।
एजेंसी को मजबूत करने के लिए बने नए पद
केंद्र सरकार ने NTA को संस्थागत रूप से मजबूत करने के लिए 16 नए वरिष्ठ पद सृजित किए हैं। इनमें 8 डायरेक्टर और 8 जॉइंट डायरेक्टर स्तर के पद शामिल हैं, जिन्हें सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत भरा जाएगा।
2018 से अब तक 270 से अधिक परीक्षाएं
2018 में गठन के बाद से NTA ने देशभर में 270 से अधिक परीक्षाओं का सफल आयोजन किया है, जिनमें 6.6 करोड़ से ज्यादा अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया। वर्ष 2026 में अब तक 12 परीक्षाओं में 65 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हो चुके हैं। वहीं, NEET (UG)-2026 परीक्षा 3 मई को 565 शहरों के 5,432 केंद्रों पर 13 भाषाओं में आयोजित की गई थी। पुनर्परीक्षा 21 जून को हुई और परिणाम 16 जुलाई को घोषित किया गया।














