हिंदी विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, बादशाहीथौल प्रांगण, टिहरी
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह के निर्देशन में बादशाहीथौल, टिहरी के हिंदी विभाग में आयोजित हिंदी पखवाड़ा उद्घाटन समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में परिसर निदेशक प्रो. ए. ए. बोड़ाई एवं अन्य विशिष्ट प्रोफेसर विद्वानों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम के शुभारंभ के उपरांत हिंदी में हस्ताक्षर अभियान चलाकर परिसर के समस्त छात्र -छात्राओं को हिंदी के प्रति जागरूक करने का कार्य किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, परिसर निदेशक प्रो. बोड़ाई ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा, “हिन्दी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है साथ ही साथ हमारे देश की आत्मा है। हिंदी हमें हमारी संस्कृति से जोड़ती है। यह देश की एकता और अखंडता के लिए अनिवार्य है। यह भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित 22 भाषाओं में एक प्रमुख स्थान रखती है। हिंदी को हमें केवल एक भाषा के रूप में नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में जन-जन के लिए लोकप्रिय बनाने के उपाय करना चाहिए ,उसे विज्ञान व न्यायालयों की भाषा के रूप में भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए। हिंदी के प्रति प्रेम व सम्मान जैसे-जैसे बढ़ेगा वैसे-वैसे इसे बढ़ावा देने के लिए विशेष आयोजनों की आवश्यकता भी कम हो जाएगी।”
इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर के पूर्व निदेशक प्रो. डी.एस. कतुरा ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी को संपूर्ण भारत में प्रचलित करने के लिए हमें अपनी झिझक को दूर करना होगा और इसे अपनाने में संकोच नहीं करना चाहिए। हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार जहां उत्तर भारत में अधिक हुआ है, वहीं दक्षिण भारत में भी इसको संपर्क भाषा के रूप में बढ़ावा देना चाहिए।
प्रो. ए. बी. थपलियाल ने अपनी कविता के माध्यम से हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही छात्र-छात्राओं को हिंदी के महत्व और उसके व्यापक उपयोग पर विचार प्रस्तुत किए।
इसी क्रम में प्रोफेसर सुबोध शर्मा ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी रोजगार परक भाषा के साथ वैश्विक भाषा भी है।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए प्रो. के. के.वर्मा सर ने कहा कि हिंदी आज न्यायालय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।इस कारण भारत के लोग न्यायालय की गतिविधियों में रुचि रखने लगे हैं।
डॉ. पूरन लाल मीणा ने छात्र- छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी की लगातार स्वीकृति बढ़ती जा रही है।
कार्यक्रम की संयोजिका और हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्पणा सिंह ने सभी समिति सदस्यों, शिक्षकों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया और हिंदी के विकास के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य हिंदी को जन-जन तक पहुंचाना और इसे और समृद्ध और लोकप्रिय बनाना है।”


कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. अमित कुमार शर्मा ने हिंदी पखवाड़ अंतर्गत आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों आज वाद- विवाद प्रतियोगिता और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। आगे के कार्यक्रमों में निबंध लेखन प्रतियोगिता, पोस्टर लेखन प्रतियोगिता, स्वरचित काव्य पाठ आदि का आयोजन किया जाएगा । साथ ही उन्होंने बताया कि आगामी वर्षों में हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए और अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और इसमें अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. रोहित कुमार ने विश्व पटल पर हिंदी के वैश्विक संदर्भ पर प्रकाश डाला और हिंदी के समक्ष समस्याओं पर चर्चा की।

हिंदी पखवाड़ा उद्घाटन समारोह के अवसर पर छात्र छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया इस अवसर पर पूर्व निदेशक प्रो. डी.एस. केंतुरा, डॉ. अर्पणा सिंह, प्रो. सुबोध कुमार, श्री हंसराज विष्ठ, डॉ. रुपाराज, डॉ. राजेश्वरी चौधरी, डॉ. नीरज जोशी, डॉ. अखिलेश कुमार, डॉ. अभिषेक पांडे, डॉ. महेंद्र, डॉ. पिया राय चौधरी, डॉ.राजपाल शास्त्री, डॉ. पूरन लाल मीणा, डॉ. सना रफी, डॉ. हेमराज, डॉ. अनिल कुमार मीणा, और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। छात्र-छात्राओं में हिंदी विभाग के शोधार्थियों पारुल सोबत आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

















