हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से सबक लेते हुए उम्मीदवार चयन में बदलाव की तैयारी, मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन और संगठन में स्वीकार्यता पर भी होगी नजर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ भाजपा ने उम्मीदवार चयन की रणनीति पर भी मंथन शुरू कर दिया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश में लगे झटके के बाद पार्टी इस बार टिकट वितरण में कई स्तरों पर बदलाव करने की तैयारी में है। संकेत हैं कि केवल वरिष्ठता, पिछला चुनावी रिकॉर्ड या किसी प्रभावशाली नेता की सिफारिश टिकट का आधार नहीं होगी।
पार्टी के भीतर मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन को लेकर भी समीक्षा की जा रही है। कई सीटों पर सत्ता विरोधी माहौल, स्थानीय स्तर पर नाराजगी और संगठन के साथ तालमेल जैसे पहलुओं को टिकट तय करते समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संभावित उम्मीदवारों की जनता के बीच पकड़, कार्यकर्ताओं के साथ संबंध और सीट पर चुनावी स्थिति का अलग-अलग स्तर पर फीडबैक लेने की तैयारी है।
पैरवी के बजाय सामूहिक सहमति पर जोर
उम्मीदवार चयन में किसी एक बड़े नेता की पसंद को प्राथमिकता देने के बजाय संगठनात्मक सहमति बनाने पर जोर रहेगा। किसी सीट पर शीर्ष नेताओं के बीच मतभेद की स्थिति में अन्य वरिष्ठ नेताओं की राय लेने और जरूरत पड़ने पर तीसरे नाम पर विचार करने की रणनीति पर चर्चा है। पार्टी का जोर ऐसे उम्मीदवारों पर रहेगा, जिनकी स्थानीय स्तर पर स्वीकार्यता और चुनावी क्षमता मजबूत हो।
नए चेहरों पर भी नजर
भाजपा की नजर युवा और महिला चेहरों के साथ संगठन से जुड़े नए कार्यकर्ताओं पर भी है। क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों के साथ उम्र, महिला प्रतिनिधित्व और संगठन में सक्रियता को उम्मीदवार चयन में महत्व दिए जाने की संभावना है।
2024 के नतीजों से लिया सबक
2024 में भाजपा उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में 33 पर सिमट गई थी, जबकि 2019 में उसने 62 सीटें जीती थीं। इसके बाद पार्टी ने उम्मीदवार चयन, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और स्थानीय एंटी-इंकंबेंसी समेत कई पहलुओं की समीक्षा की। 2027 के लिए इसी समीक्षा के आधार पर टिकट वितरण को अधिक जमीनी और फीडबैक आधारित बनाने की कवायद चल रही है।
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