हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटका व्यापार समझौता अब पटरी पर आता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देश ऐसे समझौते की रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए मौजूदा 50% टैरिफ को घटाकर लगभग 15-16% तक किया जा सकता है। हालांकि, समझौते की अंतिम घोषणा से पहले राजनीतिक मंजूरी जरूरी है, क्योंकि इसमें ऊर्जा और कृषि जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं।
मुख्य अड़चन भारत के ऊर्जा और कृषि क्षेत्र को विदेशी निवेश व व्यापार के लिए खोलने को लेकर रही है। भारत अब तक इन क्षेत्रों में बड़ी ढील देने से परहेज करता आया है, जबकि अमेरिका बार-बार इन सेक्टर्स में अधिक बाजार पहुँच की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका रूस से कच्चे तेल की खरीद पर भारत के रुख को लेकर भी दबाव बनाता रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, बदलते वैश्विक माहौल में भारत अब रूसी कच्चे तेल के आयात में धीरे-धीरे कटौती करने पर विचार कर रहा है। इसके बदले वाशिंगटन से ऊर्जा व्यापार पर रियायतें मिलने की उम्मीद है, जिसमें विशेष रूप से इथेनॉल के आयात की अनुमति और अमेरिकी कच्चे तेल व गैस की खरीद बढ़ाने के विकल्प शामिल हैं।
15 अक्टूबर को वाणिज्य सचिव श्री अग्रवाल ने कहा था कि यदि मूल्य भारत की रिफाइनरियों के लिए अनुकूल रहे, तो भारत अमेरिका से तेल और गैस के आयात में बढ़ोतरी कर सकता है। माना जा रहा है कि यह कदम अमेरिका को संतुष्ट कर सकता है और दंडात्मक आयात शुल्कों में कमी के बदले भारत को बेहतर बाज़ार पहुँच मिल सकती है।
यदि यह समझौता होता है, तो न सिर्फ भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच सामरिक-आर्थिक संबंध भी मजबूत होंगे।













