हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
उत्तर प्रदेश के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ एक अहम समझौते (MoU) का निर्णय लिया है। इसके तहत प्रदेश के 750 इंजीनियरिंग कॉलेजों में स्पेस टेक्नोलॉजी माइनर कोर्स शुरू किया जाएगा। यह 20 क्रेडिट का विशेष कोर्स बीटेक के सभी छात्रों के लिए उपलब्ध होगा।
इस कोर्स की सबसे खास बात यह है कि इसकी रूपरेखा, सिलेबस और शिक्षण पद्धति सीधे इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई है। छात्रों को पढ़ाने और मार्गदर्शन देने के लिए इसरो के विशेषज्ञ स्वयं रिसोर्स पर्सन के रूप में जुड़ेंगे। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के करीब पांच लाख छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक की आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है।
छात्रों को न केवल उच्च स्तरीय सैद्धांतिक ज्ञान मिलेगा, बल्कि उन्हें इंटरनेशनल स्पेस मिशन जैसी तैयारियों का भी अनुभव कराया जाएगा। इसके लिए सभी कॉलेजों में “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित किए जाएंगे, जहां अत्याधुनिक संसाधनों के साथ स्पेस टेक्नोलॉजी की पढ़ाई सुनिश्चित होगी।
राज्य सरकार ने भी इस योजना को व्यापक बनाने के लिए स्कॉलरशिप योजना लागू करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थी इस कोर्स का लाभ ले सकें।
बीटेक के किसी भी श्रेणी के छात्र इस कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। नए सत्र से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम युवाओं को अंतरिक्ष उद्योग और तकनीकी अनुसंधान के लिए तैयार करेगा। इसरो का अनुभव और यूपी सरकार की पहल मिलकर न केवल प्रदेश के छात्रों को नई दिशा देंगे, बल्कि भारत के स्पेस सेक्टर को भी मजबूत आधार प्रदान करेंगे।