हिन्दुस्तान मिरर न्यूज:
अलीगढ़, 29 अगस्तः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अजमल खां तिब्बिया कॉलेज के सैदला (फार्मेसी) विभाग द्वारा सना हर्बल्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से एक दिवसीय अकादमिक-इंडस्ट्री मीट का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान और आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल समाधान के बीच संबंध को मजबूत करना था।
सना हर्बल्स के महाप्रबंधक इमरान खान ने कंपनी के औद्योगिक दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए बताया कि उनकी देहलवी रेमेडीज श्रृंखला में नए उत्पाद विकसित किए गए हैं। इनमें डायबिटीज प्रबंधन हेतु डीबीएनओ, मासिक धर्म स्वास्थ्य के लिए एफएलओ 9 और कब्ज से राहत के लिए लेक्सी ईसे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये दवाएँ यूनानी चिकित्सा सिद्धांतों की प्रभावशीलता को बनाए रखते हुए आधुनिक और रोगी-अनुकूल रूपों में उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी डायबिटीज जैसी आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों को देखते हुए शुगर-फ्री उत्पादों पर विशेष ध्यान दे रही है।
फैकल्टी ऑफ यूनानी मेडिसिन के डीन प्रो. सैयद मोहम्मद सफदर अशरफ ने औषधि कंपनियों में विशेष शोध एवं विकास इकाइयों की स्थापना के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि निरंतर नवाचार, प्रमाण-आधारित अनुसंधान और नए उत्पादों के विकास के लिए ऐसी इकाइयाँ अत्यावश्यक हैं।
अजमल खां तिब्बिया कॉलेज के प्राचार्य प्रो. बदरुद्दुजा खां ने औषध निर्माण में प्रयुक्त कच्ची दवाओं की शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय चिकित्सीय परिणामों के लिए यह आवश्यक है। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच संयुक्त शोध की वकालत की ताकि शैक्षणिक निष्कर्षों को व्यावहारिक स्वास्थ्य समाधान में बदला जा सके।
शिक्षकों और शोधार्थियों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिससे संवाद और अधिक समृद्ध हुआ। योगदान की सराहना करते हुए डॉ. अजीजुर्रहमान ने कहा कि इस कार्यक्रम ने भविष्य में अनुसंधान एवं विकास समाकलन, उत्पाद नवाचार, छात्र प्रशिक्षण और ज्ञान हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन भी प्रस्तुत किया।