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पाकिस्तान ने अमेरिका को पोर्ट ऑफर किया: आर्थिक संकट में डूबे इस्लामाबाद का नया दांव

5 अक्टूबर 2025 | ब्यूरो रिपोर्ट

पाकिस्तान ने अपने दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में स्थित पासनी पोर्ट (Pasni Port) को संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) को विकसित करने और संचालित करने के लिए ऑफर किया है।
यह ऑफर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्वादर पोर्ट के बेहद करीब है, जिसे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका इस पोर्ट पर टर्मिनल का निर्माण करेगा और उसके बाद उसका संचालन भी करेगा। यह सौदा पाकिस्तान को अमेरिका से प्रत्यक्ष निवेश (Direct Investment) और आर्थिक सहायता दिलाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


🔸 ट्रंप से मुलाक़ात के दौरान रखा गया प्रस्ताव

सूत्रों के मुताबिक़, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ ने हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपसे मुलाक़ात के दौरान यह प्रस्ताव रखा था।
बताया जा रहा है कि इस बैठक के दौरान पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका को Rare Earth Minerals (दुर्लभ खनिजों) के सैंपल दिखाए, जिनकी वैश्विक मांग तेज़ी से बढ़ रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान चाहता है कि अमेरिका इन मिनरल्स के दोहन और प्रोसेसिंग के लिए वहां निवेश करे।


🔸 ग्वादर और चाबहार के बीच रणनीतिक स्थिति

पासनी पोर्ट, ग्वादर (Gwadar) और ईरान के चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) के बीच स्थित है।
विश्लेषकों के मुताबिक़, यदि अमेरिका इस पोर्ट पर निवेश करता है, तो उसे अरब सागर (Arabian Sea) में महत्वपूर्ण नौसैनिक पहुँच मिल सकती है, जिससे वह ईरान पर नज़र रखने की स्थिति में भी रहेगा।
हालाँकि पाकिस्तान ने यह स्पष्ट किया है कि इस पोर्ट पर “कोई अमेरिकी सैन्य बेस नहीं” बनाया जाएगा और यह केवल “आर्थिक एवं व्यापारिक उद्देश्य” से प्रयोग किया जाएगा।


🔸 आर्थिक संकट में पाकिस्तान की मजबूरी

2025 तक पहुँचते-पहुँचते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है।
विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में गरीबी दर (Poverty Rate) लगातार बढ़ रही है और देश को अपने राजस्व जुटाने तथा सार्वजनिक खर्च (Public Expenditure) के प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता है।

पिछले दो वर्षों में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ — जैसे Procter & Gamble, Microsoft, Shell, Total Energies, Pfizer, और Gillette — पाकिस्तान से अपना कारोबार समेट चुकी हैं।
इस ‘कॉरपोरेट एक्ज़ोडस’ (Corporate Exodus) के कारण देश की मिडिल क्लास की क्रय शक्ति (Purchasing Power) और निवेशकों का विश्वास दोनों बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।


🔸 सीपैक का असर फीका, अमेरिकी निवेश की उम्मीद

2015 में लॉन्च हुआ चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) पाकिस्तान के लिए ‘गेम चेंजर’ बताया गया था, लेकिन एक दशक बाद अब इसे “ओवरहाइप्ड और अधूरा सपना” कहा जा रहा है।
सीपैक के तहत शुरू कई प्रोजेक्ट अधूरे रह गए हैं और चीन का आर्थिक निवेश अब सुस्त पड़ गया है।
इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान अमेरिका को लुभाने की कोशिश कर रहा है ताकि देश को नई फंडिंग और राजनीतिक सहारा मिल सके।


🔸 क्या यह अमेरिकी प्रभाव की शुरुआत है?

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका पासनी पोर्ट में निवेश करता है, तो यह पाकिस्तान की भू-राजनीतिक दिशा (Geopolitical Alignment) में बड़ा बदलाव ला सकता है।
इससे चीन और पाकिस्तान के रिश्तों पर असर पड़ सकता है और भारत के लिए भी नई रणनीतिक परिस्थितियाँ बन सकती हैं।

हालाँकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं दी गई है।
कुछ विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान अपने एसेट्स (Assets) — जैसे एयरपोर्ट, रेलवे, भूमि और बंदरगाह — बेचकर अस्थायी आर्थिक राहत तलाश रहा है, जबकि दीर्घकालिक समाधान अभी दूर है।


🔸 भारत पर प्रभाव

भारत के लिए यह घटनाक्रम दक्षिण एशियाई सामरिक परिदृश्य में नया मोड़ ला सकता है।
हाल के दिनों में भारतीय रक्षा नेतृत्व ने पाकिस्तान के प्रति आक्रामक बयान दिए हैं, और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक कमज़ोर पाकिस्तान भारत के लिए सुरक्षा और कूटनीति दोनों स्तरों पर फ़ायदे का सौदा साबित हो सकता है।


🔸 निष्कर्ष

पासनी पोर्ट डील फिलहाल एक प्रस्ताव मात्र है, लेकिन यह पाकिस्तान की आर्थिक मजबूरियों और वैश्विक भू-राजनीति के बदलते समीकरणों का संकेत ज़रूर देती है।
अगर अमेरिका इस ऑफर को स्वीकार करता है, तो यह दक्षिण एशिया में एक नए सामरिक गठजोड़ (Strategic Realignment) की शुरुआत साबित हो सकता है।


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