हिन्दुस्तान मिरर न्यूज़ :
चिदंबरम के गर्व वाले तंज के बाद सियासत गरमाई, रिजिजू बोले-
प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को नहीं कहा दिमागी नक्सल’
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ का जिक्र अब
राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना किए जाने
के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को सफाई देते हुए कहा कि पीएम मोदी ने
विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक सूची
साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री किन लोगों के संदर्भ में यह बात कह रहे थे।
रिजिजू के मुताबिक, दिमागी नक्सल’ उन लोगों को कहा गया है जो माओवादियों का समर्थन करते हैं
और भारतीय संविधान को नहीं मानते। उन्होंने ऐसे लोगों में उन लोगों को भी शामिल बताया जो
अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं। इसके अलावा उन्होंने उन
लोगों का जिक्र किया जो पूर्वोत्तर भारत को देश से अलग करने के लिए चिकन नेक’ काटने की बात
करते हैं।
रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की बात को राजनीतिक रंग देकर पेश किया
जा रहा है। उनका दावा है कि लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने किसी विपक्षी नेता को व्यक्तिगत
तौर पर ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था।
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में कहा था कि हथियारबंद नक्सलवाद के
खिलाफ देश को बड़ी सफलता मिली है, लेकिन माओवादी विचारधारा से प्रभावित दिमागी नक्सल’ अब
भी मौजूद हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत बताई थी।
प्रधानमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने एक्स पर
तंज कसते हुए लिखा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस
शब्द को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कहा कि इसका कोई स्पष्ट अर्थ या परिभाषा नहीं है। उन्होंने
‘अर्बन नक्सल’ की पुरानी बहस का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री पर राजनीतिक विरोधियों के लिए नया
शब्द गढ़ने का आरोप लगाया।
इस मुद्दे ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के बाद केंद्र और विपक्ष के बीच वैचारिक टकराव को और तेज
कर दिया है।














